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Amar sandesh नई दिल्ली। बैंक ऑफ इंडिया ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) में हुए नवीनतम संशोधनों और उनकी व्यावहारिक उपयोगिता पर अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) के सहयोग से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला में IBBI के अध्यक्ष रवि मित्तल, पूर्णकालिक सदस्य भूषण कुमार सिन्हा, बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजनीश कर्नाटक, बैंक के कार्यपालक निदेशक तथा देशभर से जुड़े रिकवरी, विधिक एवं एआरबी (ARB) क्षेत्र के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
इस अवसर पर बैंक ऑफ इंडिया के एमडी एवं सीईओ रजनीश कर्नाटक ने कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता में समय-समय पर किए जा रहे संशोधन बैंकिंग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन प्रावधानों की गहन समझ से ऋण वसूली की प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के निरंतर प्रशिक्षण और ज्ञानवर्धन से बैंक की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा ग्राहकों और हितधारकों का विश्वास भी मजबूत होगा।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने IBC में हालिया नियामकीय बदलावों, दिवाला समाधान प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं तथा ऋण वसूली से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे जटिल मामलों के समाधान में बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
बैंक ऑफ इंडिया ने इस आयोजन के माध्यम से अधिकारियों के ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करने तथा प्रभावी रिकवरी तंत्र विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।
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