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खुदरा महंगाई का आंकड़ा आया नीचे – क्या कम होगी ब्याज दरें ?

लेखक महाबीर सिह

 

दिल्ली।खुदरा महंगाई का आंकड़ा जुलाई में चार प्रतिशत से नीचे आ गया है। जुलाई 2024 में खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का आंकड़ा 3.54 प्रतिशत रह गया। यह आंकड़ा पिछले करीब पांच साल में सबसे कम है। एक महीना पहले जून में यह 5.08 प्रतिशत था। वहीं एक साल पहले जुलाई की बात की जाये तो तब यह आंकड़ा 7.44 प्रतिशत की उंचाई पर था जो कि इस साल जुलाई में घटकर 3.54 प्रतिशत रह गया। अब यह देखने की बात है कि रिजर्व बैंक का अगला कदम क्या होता है।

मुद्रास्फीति के आंकड़े में आई इस गिरावट का अर्थ यह कदापि नहीं लगाया जाना चाहिये कि महंगाई घट गई है, बल्कि इसे इस तरह समझा जाना चाहिये कि पिछले साल यानी जुलाई 2023 में जहां खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 7.44 प्रतिशत पर थी, वहीं इस साल जुलाई में यह पिछले साल जुलाई के मुकाबले 3.54 प्रतिशत बढ़ी है। जब हम महंगाई कहते हैं तो इसका सीधा से मतलब है दाम बढ़े हैं, बस केवल बढ़ने की रफ्तार कम अथवा ज्यादा होती है। जुलाई 2023 के बाद से खुदरा महंगाई के आंकड़े में उतार- चढ़ाव आता रहा है। अगस्त 2023 में यह 6.83 प्रतिशत रही, उसके बाद सीमित उतार-चढ़ाव के चलते इस साल जनवरी में 5.10 प्रतिशत, अप्रैल में 4.83 प्रतिशत, जून में 5.08 और अब जुलाई में 3.54 प्रतिशत रह गई। यह आरम्भिक आंकड़ा है, बाद में इसमें थोड़ा बहुत बदलाव भी आ सकता है।

भारत सरकार का सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ये आंकड़े जारी करता है। जुलाई 2024 में मुद्रास्फीति 59 माह में सबसे कम रही है। वहीं, अखिल भारतीय खाद्य मूल्य सूचकांक में भी जुलाई में साल दर साल आधार पर 5.42 प्रतिशत वृद्धि रही। यह आंकड़ा भी जून 2023 के बाद सबसे कम है। समूचे खुदरा मूल्य सूचकांक में खाद्य और पेय समूह का सबसे अधिक 45.86 प्रतिशत वजन है। इसलिये इस समूह में होने वाली घटबढ़ का समूचे सूचकांक पर असर अधिक पड़ता है। जुलाई सभी समूहों में मुद्रास्फीति का आंकड़ा नीचे आया है। सबसे ज्यादा गिरावट सब्जियों, खाद्य तेल एवं वसा और मसालों के उप-समूहों में दर्ज की गई। कितनी गिरावट रही, कुछ का जिक्र यहां करते हैं, जैसे कि अनाज और उसके उत्पादों की महंगाई पिछले साल, उससे एक साल पहले के मुकाबले जहां 13.04 प्रतिशत बढ़ी थी वहीं इस साल जुलाई में यह 8.14 प्रतिशत बढ़ी है। दूध और उसके उत्पादों में जुलाई 2023 में 8.34 प्रतिशत वृद्धि रही जो कि इस साल 2.99 प्रतिशत ही रही। सब्जियों की बात करें तो जुलाई 2023 में सब्जियों के दाम 37 प्रतिशत बढ़े थे जो कि इस साल जुलाई में 6.83 प्रतिशत ही बढ़े है। मसाले पिछले साल 21.63 प्रतिशत महंगे हुये थे जबकि इस साल जुलाई में इनके दाम उस उंचाई से 1.43 प्रतिशत नीचे आ गये, जी हां, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मसालों के दाम पिछले साल जुलाई के मुकाबले कम हुये हैं। इनका सूचकांक 1.43 प्रतिशत नीचे आया है। वहीं, फल के दाम में लगातार मजबूती बनी हुई है। फल के दाम पिछले साल भी 3.16 प्रतिशत बढे और इस साल इनमें उसके उपर 3.84 प्रतिशत की और वृद्धि दर्ज की गई।

रिजर्व बैंक खुदरा महंगाई के आंकड़े को चार प्रतिशत के आसपास लाने का लक्ष्य रखकर ही नीति बनाता है। मौद्रिक नीति समिति खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत अथवा उससे नीचे लाने के लक्ष्य के साथ ही नीतिगत कदम उठाती है। अब सवाल यह है कि जब जुलाई में खुदरा महंगाई चार प्रतिशत से नीचे आ गई है तो क्या रिजर्व बैंक दो माह बाद होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कमी लाने की तरफ कदम उठायेगा, या अभी कुछ महीने और प्रतीक्षा करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खुदरा महंगाई की दर आगे भी इसी स्तर के आसपास बनी रहती है तो निश्चित ही भारतीय रिजर्व बैंक दिसंबर तक रेपो रेट में कटौती कर सकता है। पिछले 19 महीनों से रेपो दर 6.50 प्रतिशत के उच्चस्तर पर बरकरार है। जबकि एक समय (अप्रैल 2022 में) यह 4 प्रतिशत के स्तर पर थी। इसके बाद से यह लगातार बढ़ती हुई फरवरी 2023 में 6.50 प्रतिशत पर पहुंच गई और तब से इसी स्तर पर है। रिजर्व बैंक बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिये अर्थव्यवस्था में मुद्रा प्रसार पर अंकुश लगाता है और इसके लिये वह रेपो दर में वृद्धि करता है। महंगाई को काबू में रखने के विभिन्न उपायों में से यह एक प्रमुख उपाय है। मुद्रा प्रसार कम होने से अर्थव्यवस्था में मांग नियंत्रित होती है, जिससे महंगाई का दबाव कम होता है।

रिजर्व बेंक के गर्वनर शक्तिकांत दास खाद्य महंगाई को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैंै। मौद्रिक नीति समिति की अगस्त में हुई बैठक में चालू वित्त वर्ष के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति के 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

घरेलू अर्थव्यवस्था में गतिविधियां हालांकि बेहतर रहने की उम्मीद व्यक्त की गई है जबकि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य लचीला बना रहेगा, हालांकि उसकी रफ्तार में कुछ धीमापन रह सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार 675 अरब डालर के एतिहासिक स्तर तक पहुंच चुका है। रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि की गति को बेहतर बनाये रखना चाहता है जबकि दूसरी तरफ महंगाई पर भी अंकुश रखना चाहता है। यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती है।

थोक मुद्रास्फीति की यदि बात की जाये तो जुलाई 2024 में यह तीन माह के निचले स्तर 2.04 प्रतिशत पर रही। यहां भी खाद्य पदार्थ खासकर सब्जियों के दाम में गिरावट इसकी प्रमुख वजह रही। इससे पहले जून में थोक मुद्रास्फीति 3.36 प्रतिशत थी। एक साल पहले जुलाई में इसमें 1.23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

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