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“एक से अनंत” : लेखक का आध्यात्मिक चेतना और जीवन अनुभवों का अनूठा संगम

Amar sandesh नई दिल्ली। साहित्य और आध्यात्मिक चिंतन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कृति “एक से अनंत” का प्रकाशन शिवोहम प्रकाशन द्वारा किया गया है। उत्तराखंड मूल के लेखक योगेश गहतोड़ी “यश” की यह एकल काव्य-पुस्तिका अपने गूढ़ दार्शनिक संदेश और सरल अभिव्यक्ति के कारण पाठकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

पुस्तक का प्रकाशन 5 मार्च 2026 को हुआ, जबकि इसका विधिवत विमोचन 15 मार्च 2026 को गुड़गांव में आयोजित “साहित्यिक सचेतना” के तृतीय वर्षिकोत्सव के अवसर पर किया गया। इस मौके पर उपस्थित साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने पुस्तक के आध्यात्मिक दृष्टिकोण और जीवन दर्शन को सराहा।

पुस्तक का मूल भाव “एक” में समाहित उस अनंत शक्ति और सृजन के विस्तार को प्रस्तुत करता है, जो समस्त सृष्टि का आधार है। काव्य के माध्यम से लेखक ने जीवन, ब्रह्मांड और आत्मचिंतन के गहरे पहलुओं को सहज भाषा में अभिव्यक्त किया है।

इस पुस्तक के लेखक का जीवन परिचय

योगेश गहतोड़ी “यश” मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी हैं और वर्ष 1990 से दिल्ली में निवास कर रहे हैं। वे पिछले लगभग 35 वर्षों से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में कार्यरत हैं तथा मानव संसाधन (HR), प्रशासन (Admin) और मास्टर डेटा प्रबंधन (MDM) जैसे क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्य कर रहे हैं।

आईटी क्षेत्र के साथ-साथ वे ज्योतिष परामर्श के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों का मार्गदर्शन भी करते रहे हैं। साहित्य और लेखन में उनकी रुचि बचपन से रही है, जबकि पिछले कुछ वर्षों से उन्होंने नियमित लेखन की दिशा में सक्रिय कदम बढ़ाए हैं।इसके अतिरिक्त, वे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में जिम्मेदार पदों पर रहते हुए सामाजिक सेवा कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं।

इस पुस्तक के प्रकाशक का विवरण इस कृति का प्रकाशन शिवोहम प्रकाशन (कोलकाता/हैदराबाद) द्वारा किया गया है।

पता: न्यू टाउन, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)700156 एवं चित्रपुरी कॉलोनी, हैदराबाद (तेलंगाना)

ईमेल: shivohamphouse16@gmail.com

“एक से अनंत” केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि जीवन और सृष्टि के मूल तत्वों को समझने की एक सार्थक पहल है। लेखक ने अपने अनुभव, आध्यात्मिक चिंतन और संवेदनशील दृष्टिकोण को शब्दों में पिरोकर पाठकों को आत्ममंथन की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास किया है। यह कृति साहित्य जगत में एक सकारात्मक और विचारोत्तेजक योगदान के रूप में देखी जा रही है।

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