Sunday, July 5, 2026
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कम उम्र में बढ़ रहा फैटी लिवर और डायबिटीज का खतरा, डॉ. जितेंद्र सिंह बोले अब इलाज नहीं, बचाव को बनाना होगा राष्ट्रीय मिशन

आईएलबीएस में ‘लिवर एंड मेटाबोलिक डिजीज नेटवर्क’ की तीसरी वर्षगांठ पर केंद्रीय मंत्री ने दी चेतावनी, कहा मोटापा, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज एक-दूसरे से जुड़े गंभीर खतरे

Amar sandesh नई दिल्ली। भारत में फैटी लिवर, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य चयापचय (मेटाबोलिक) संबंधी बीमारियां तेजी से कम उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि इन बीमारियों को अब केवल चिकित्सा समस्या मानना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इन्हें रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरूकता और निवारक स्वास्थ्य अभियान चलाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में “लिवर एंड मेटाबोलिक डिजीज नेटवर्क” की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी बीमारियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे के लिए जोखिम कारक बन रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ जन आंदोलन का आह्वान कर रहे हैं और इसी दिशा में पूरे देश को मिशन मोड में कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पहले ये बीमारियां मुख्य रूप से मध्यम आयु और बुजुर्गों में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब युवा और किशोर भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल उपचार तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर अधिक ध्यान देना होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीयों की आनुवंशिक संरचना, पेट के आसपास बढ़ती चर्बी और विशिष्ट शारीरिक बनावट उन्हें अपेक्षाकृत कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) होने के बावजूद मधुमेह, फैटी लिवर और हृदय रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। इसलिए भारत को अपने डेटा, अपने शोध और अपनी परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य समाधान विकसित करने होंगे।

उन्होंने कहा कि लिवर शरीर का सबसे अधिक पुनर्जीवित होने वाला अंग है, लेकिन अस्वास्थ्यकर खान-पान, तनाव, अनियमित नींद, निष्क्रिय जीवनशैली और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण यह लगातार प्रभावित हो रहा है। इन कारणों पर नियंत्रण पाना सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने आईएलबीएस द्वारा राष्ट्रीय लिवर बायोबैंक स्थापित करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान करने वाली किफायती जांच तकनीकों, सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग और स्वदेशी बायोमार्कर विकसित करना समय की आवश्यकता है। इससे गंभीर स्थिति बनने से पहले ही मरीजों का उपचार संभव हो सकेगा।

उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि भारत का जीनोम मिशन, जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भविष्य में सटीक और व्यक्तिगत चिकित्सा व्यवस्था विकसित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वैज्ञानिक प्रगति पर्याप्त नहीं है। जब तक लोगों में जागरूकता नहीं बढ़ेगी और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव नहीं आएगा, तब तक इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चिकित्सा विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया से वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने और पोषण, मोटापा तथा जीवनशैली संबंधी बीमारियों को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों का मिलकर मुकाबला करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब देश की युवा आबादी स्वस्थ होगी। मधुमेह और फैटी लिवर जैसी बीमारियों पर नियंत्रण केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की मानव पूंजी, उत्पादकता और आर्थिक विकास को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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