समाज में सकारात्मक बदलाव लाता है सत्संग—-माता श्री मंगला

नई दिल्ली। द हंस फाउंडेशन की प्रेरणास्रोत एवं आध्यात्मिक विभूति माता श्री म़गला ने कहा है कि जिस तरह गंगा मां किसी व्यक्ति से उसकी जाति और धर्म नहीं पूछती बल्कि बिना किसी भेदभाव के सभी की प्यास को मिटाती है इसी तरह सत्संग भी किसी के अंदर ऊंच-नीच, छोटा-बडा, जात-पात और अमीरी-गरीबी नहीं देखता। जो भी व्यक्ति सत्संग को ध्यान से सुनकर उसको आचरण में उतारता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।

माता श्री मंगला हंस ज्योति द्वारा परमपूज्य श्री भोले महाराज के पावन जन्मोत्सव के शुभारंभ पर देश के विभिन्न भागों से आये साधु-संतों और श्रद्वालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा सत्संग और संतों के सानिध्य ने अंगुलीमाल‌ एवं रत्नाकर जैसे दुष्पृवति के लोगों का हृदय परिवर्तन कर उन्हें सच्चा संत बना दिया। उन्होंने कहा कि सत्संग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करता है।

माता श्री मंगला ने कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि सावन मास में हम श्री भोले महाराज का पावन जन्मोत्सव मना रहे हैं। सावन मास भगवान भोलेनाथ को‌ बहुत प्रिय है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव बहुत ही पवित्र, परोपकारी और दयालु हैं। वे भक्त की छोटी सी सेवा से प्रसन्न होकर उसको मनोवांछित फल प्रदान करते हैं, लेकिन भक्त के अंदर छल-कपट नहीं होना चाहिए। उन्होंने समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे सद्गुरु महाराज से भगवान के सच्चे नाम को जानकर भजन-सुमिरण करके अपने मानव जीवन को सार्थक करें।

इस मौके पर भजन‌ गायक लखेड़ा एवं अन्य भक्तों ने भक्ति भाव के भजन और बधाई गीत गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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