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Amar sandesh
नई दिल्ली।भारतीय विज्ञापन जगत के प्रख्यात हस्ताक्षर स्वर्गीय पियूष पांडे की स्मृति को समर्पित दो दिवसीय ‘पियूष रंग महोत्सव’ का आयोजन 17 एवं 18 अप्रैल 2026 को श्री राम सेंटर, मंडी हाउस में किया जाएगा। इस महोत्सव का आयोजन उनकी बहन एवं प्रख्यात रंगकर्मी रमा पांडे द्वारा किया जा रहा है, जो उनके रचनात्मक योगदान को नमन करते हुए एक सांस्कृतिक श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत 17 अप्रैल को ‘दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद’ तथा 18 अप्रैल को ‘ठाकुर जालिम सिंह’ नाटकों का मंचन प्रतिदिन सायं 6:30 बजे किया जाएगा। दोनों प्रस्तुतियाँ समाज, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं के विविध आयामों को अभिव्यक्त करेंगी।
महोत्सव के दौरान कला और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित भी किया जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी को भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए ‘संस्कृतिशील फॉर प्रिजर्विंग कल्चर ऑफ इंडिया’ सम्मान प्रदान किया जाएगा। वहीं, 98 वर्षीय पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए ‘साहित्यश्री सम्मान’ से अलंकृत किया जाएगा।
इस अवसर पर विद्यार्थियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। महोत्सव में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। साथ ही एक विशेष ‘फोटो कॉर्नर’ भी स्थापित किया जाएगा, जो पियूष पांडे की विशिष्ट पहचान उनकी प्रसिद्ध मूंछों को समर्पित होगा। आगंतुकों के लिए ‘कुछ मीठा हो जाए’ थीम के तहत कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट का वितरण भी किया जाएगा।
बयान रमा पांडे ने कहा, “मेरे लिए ‘पियूष रंग महोत्सव’ अत्यंत भावनात्मक और विशेष महत्व रखता है। मेरे भाई पियूष पांडे अपने एक-एक शब्द से लोगों के दिलों को छू लेते थे। उनकी सादगी और गहराई उन्हें विशिष्ट बनाती थी। उनके जाने के बाद भी उनके विचार और शब्द समाज को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। इस महोत्सव के माध्यम से हम उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।”
श्री सच्चिदानंद जोशी ने कहा, “‘पियूष रंग महोत्सव’ हमारी रचनात्मक ऊर्जा की मनोहारी अभिव्यक्ति है, जिसमें कलात्मकता और भावनात्मक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।”
पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला ने कहा, “पियूष पांडे जी रचनात्मक प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
‘दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद’ एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित कथा है, जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को एक प्राचीन नीम के पेड़ के माध्यम से जीवंत करती है। वहीं ‘ठाकुर जालिम सिंह’ सत्ता, लोभ और आत्मबोध की कहानी है, जो व्यक्ति को अपने कर्मों के परिणामों से रूबरू कराती है।
रत्नव एक सांस्कृतिक संस्था है, जो भारत की पारंपरिक मौखिक और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित है। इसकी स्थापना रमा पांडे द्वारा की गई है। संस्था का उद्देश्य लुप्त होती लोक परंपराओं को रंगमंच और कहानी कहने की कला के माध्यम से पुनर्जीवित करना और उन्हें व्यापक मंच प्रदान करना है।
रमा पांडे एक बहुआयामी रंगकर्मी हैं, जिनका रंगमंच, टेलीविजन और फिल्म जगत में व्यापक अनुभव है। वे पिछले 15 वर्षों से दूरदर्शन राजस्थान पर प्रसारित कार्यक्रम ‘जाने अपना देश’ के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचा रही हैं। उन्होंने ‘शतरंज के मोहरे’, ‘आषाढ़ का एक दिन’, ‘भूमिजा’, ‘जसमा ओडन’ और ‘शकुंतला’ जैसे चर्चित नाटकों में प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं।
यह महोत्सव न केवल पियूष पांडे के रचनात्मक जीवन को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि भारतीय रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
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