एआई, सेमांटिक और स्पीच सर्च से लेकर 22 भाषाओं में कानूनी जानकारी तक नागरिकों, वकीलों और शोधकर्ताओं के लिए डिजिटल कानून की नई सुविधा
Amar sandesh नई दिल्ली।कानूनों तक आम नागरिक की पहुंच को आसान, तेज और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में पुनर्गठित ‘इंडिया कोड पोर्टल’ का शुभारंभ किया। नए स्वरूप में पोर्टल को आधुनिक डिजिटल तकनीक और नागरिक-केंद्रित सुविधाओं से लैस किया गया है।
कार्यक्रम में भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार और विधायी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के महानिदेशक प्रियंका भारती, इंडिया-एआई मिशन के मुख्य परिचालन अधिकारी सुदीप श्रीवास्तव सहित एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कानून तक पहुंच को बताया न्याय तक पहुंच की पहली सीढ़ी
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संविधान का महत्व तभी व्यापक रूप से प्रभावी होता है, जब नागरिकों और सभी हितधारकों को कानून आसानी से उपलब्ध और समझने योग्य हो। उन्होंने कहा कि इंडिया कोड पोर्टल संविधान, केंद्रीय अधिनियमों, नियमों और अन्य विधायी सूचनाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने वाला विश्वसनीय और व्यापक डिजिटल मंच है।
उन्होंने पोर्टल के पुनर्गठन में विधायी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों तथा एनआईसी की तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना की। उनके अनुसार नई व्यवस्था से विधायी जानकारी की उपलब्धता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित वितरण को मजबूती मिलेगी।
एआई और स्मार्ट सर्च से कानून तलाशना होगा आसान
पुनर्गठित पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में एआई-सहायता प्राप्त खोज, सेमांटिक सर्च और स्पीच आधारित सर्च शामिल हैं। यानी उपयोगकर्ता केवल पारंपरिक तरीके से कानून का नाम खोजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक खोज तकनीक के माध्यम से संबंधित विधायी जानकारी तक अधिक सहजता से पहुंच सकेगा।
पोर्टल में बेहतर सर्च और नेविगेशन, अधिनियमों एवं अधीनस्थ विधानों के बीच लिंक, संशोधनों तथा विधायी इतिहास तक पहुंच, ई-गजट इकोसिस्टम के साथ एकीकरण और बेहतर दस्तावेज देखने की सुविधा भी जोड़ी गई है।
इसके अलावा क्यूआर-कोड आधारित पहुंच और नागरिकों की प्रतिक्रिया के लिए व्यवस्थित व्यवस्था भी पोर्टल का हिस्सा बनाई गई है।
22 भाषाओं में कानून तक पहुंच का लक्ष्य
पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में एआई-सहायता प्राप्त बहुभाषी कानूनी पहुंच उपलब्ध कराना है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के नागरिक अपनी सुविधा के अनुरूप भाषा में कानूनी जानकारी प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य इंडिया कोड को केवल कानूनों और विधायी दस्तावेजों के ऑनलाइन संग्रह तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे एक परस्पर जुड़ा, खोजने में आसान और नागरिक-केंद्रित डिजिटल कानूनी गेटवे बनाना है।
केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के कानून एक डिजिटल संग्रह में
इंडिया कोड केंद्रीय अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों के साथ-साथ राज्य अधिनियमों, उनके अधीनस्थ विधानों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों और विनियमों का एकीकृत डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराता है।
भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कानूनों तक भौतिक पहुंच से डिजिटल पहुंच की ओर हुए बदलाव को महत्वपूर्ण बताते हुए नए पोर्टल की उपयोगकर्ता-अनुकूल सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने पोर्टल को लगातार तकनीकी रूप से अद्यतन रखने और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।
विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने पोर्टल के विकासक्रम और नागरिकों, कानूनी पेशेवरों, सरकारी विभागों तथा अन्य हितधारकों को प्रामाणिक और अद्यतन विधायी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में किए गए प्रयासों की जानकारी दी।
अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कानून तक पहुंच न्याय तक पहुंच की दिशा में पहला कदम है। उनके अनुसार कानून केवल उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे खोजना, समझना, नेविगेट करना और उपयोग करना भी आसान होना चाहिए।
कानून और नागरिक के बीच दूरी घटाने की कोशिश
पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल का व्यापक उद्देश्य तकनीक के माध्यम से कानून और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करना है। एआई, बहुभाषी सुविधाओं, स्मार्ट सर्च, स्पीच सर्च और परस्पर जुड़े विधायी दस्तावेजों के माध्यम से कानूनी जानकारी को अधिक खोजने योग्य, सुलभ, पारदर्शी और उपयोगी बनाने की कोशिश की गई है।
सरकार के अनुसार यह पहल कानूनी जागरूकता बढ़ाने, नागरिक भागीदारी को मजबूत करने तथा न्यायिक, कानूनी और सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नए इंडिया कोड पोर्टल के जरिए सरकार की कोशिश साफ है—कानून केवल किताबों और दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि हर नागरिक तक उसकी सुविधा की भाषा और डिजिटल माध्यम में आसानी से पहुंचें।