Thursday, October 1, 2026
उत्तर प्रदेशस्वास्थ्य

बीबीएयू में ‘योग महाकुंभ’ का आयोजन, शोध आधारित यौगिक सत्र में सैकड़ों साधकों ने लिया भाग

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के योग विभाग एवं योग वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में ‘योग महाकुंभ’ का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के मार्गदर्शन में चल रही यह पहल शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई है।कार्यक्रम के अंतर्गत दस दिवसीय शोध आधारित यौगिक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों योग साधकों ने सहभागिता की। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य शरीर के प्रत्येक तंत्र से संबंधित यौगिक अभ्यास कराना और आहार विषयक वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना रहा।इस अवसर पर योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं संज्ञानात्मक अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. बी.सी. यादव, योग विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. नवीन जी. हलप्पा एवं योग विशेषज्ञ डॉ. सागर सैनी उपस्थित रहे।प्रो. बी.सी. यादव ने कहा, “योग आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक संतुलन का भी माध्यम है, जो जीवन में कृतज्ञता और सरलता लाने में सहायक होता है।”विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने योग को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “योग के माध्यम से आधुनिक जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान संभव है।

”डॉ. नरेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “शोधों से प्रमाणित हो चुका है कि योग तनाव को कम करता है और हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाकर समग्र स्वास्थ्य में सुधार लाता है। साथ ही यह शरीर में लचीलापन, शक्ति और संतुलन को भी सुदृढ़ करता है।”योग और आहार के संबंध पर प्रकाश डालते हुए डॉ. नवीन जी. हलप्पा ने कहा, “संतुलित आहार और नियमित योग का समन्वय हमारे शरीर और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।”डॉ. सागर सैनी ने बताया कि “योग महाकुंभ के अंतर्गत विश्वविद्यालय में विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को दृष्टिगत रखते हुए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।”यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास की दिशा में कारगर सिद्ध हुआ, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वास्थ्य-प्रेरित गतिविधियों को नई दिशा देने में भी सहायक रहा।

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