दिल्ली में लगने जा रहे हैं 3 बड़े SARAS मेले—महिलाओं को मिलेगा सीधा बाजार!”
Amar sandesh नई दिल्ली। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले SARAS आजीविका मेलों का कैलेंडर अंतिम रूप से जारी कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका, महिला उद्यमिता और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देना है। कैलेंडर के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में तीन प्रमुख SARAS आयोजनों की योजना तय की गई है।
जारी कार्यक्रम के मुताबिक, SARAS आजीविका मेला 2026 का आयोजन 22 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक (17 दिन) गुरुग्राम के लीजर वैली पार्क में किया जाएगा। इसके बाद 21 नवंबर से 8 दिसंबर 2026 तक (18 दिन) नई दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में SARAS फूड फेस्टिवल आयोजित होगा। वहीं, SARAS आजीविका मेला 2027 का आयोजन 1 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक (28 दिन) मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, नई दिल्ली में किया जाएगा।
ये आयोजन दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत किए जाते हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और कारीगरों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराना है।
इन मेलों में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी अपेक्षित है। प्रतिभागी हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, प्राकृतिक एवं जैविक वस्तुएं तथा क्षेत्रीय खाद्य उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे। इससे ग्रामीण महिलाओं को सीधे शहरी उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय और पहचान दोनों में वृद्धि होने की संभावना है।
मंत्रालय के अनुसार, SARAS मेले ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही, प्रतिभागियों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से संबंधित क्षमताओं के विकास में भी सहयोग प्रदान किया जाता है।
व्यापारिक गतिविधियों के अलावा, इन आयोजनों में पारंपरिक कला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और क्षेत्रीय व्यंजनों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता का भी प्रदर्शन किया जाता है। मंत्रालय का मानना है कि इस प्रकार के बाजार-आधारित मंच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वित्त वर्ष 2026–27 का यह कैलेंडर ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों के विस्तार और समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

