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राष्ट्रीय संस्कृत महोत्सव का धूमधाम के साथ समापन 

पुरी।केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,

दिल्ली के परिसरों के द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत नाट्य महोत्सव का आज इसके पुरी परिसर में धूमधाम के साथ समापन हुआ । सीएसयू , दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने जीवंत मंचन के लिए छात्र छात्राओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि नाटक तो रसमय होता है । लेकिन इसका भी ध्यान रहे कि सभी नौ रस भगवान की लीलाओं में ही तिरोहित हो जाता है ।इस संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि वेद में भी रस की दार्शनिकता समाहित है ।रसस्वरूप के प्रतीक भगवान जगन्नाथ के धाम पुरी में इसका समापन बड़ी भव्यता के साथ हुआ भी बड़ी ही महत्त्वपूर्ण है ।प्रो वरखेड़ी ने नाट्य समापन के इस पुरस्कार वितरण समारोह में इस बात पर भी बल देते यह भी कहा कि समय की मांग है कि आज के संस्कृत नाटकों का मंचन अन्य प्रादेशिक भाषाओं के कुछ संवादों के साथ भी किया जाना चाहिए ।इससे जनमानस में इस बात की पुष्टि होगी कि संस्कृत भारतीय भाषाओं की जननी है और इससे भारतीय भाषाओं की आपसी सहकार भी सुदृढ होगा । ध्यातव्य है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी पहली बार ठोस ढंग से भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा संबद्धन के लिए पहल किया गया है ।

आज के समापन समारोह के मुख्य अतिथि तथा संगीत नाटक अकादमी , दिल्ली की अध्यक्षता डा सन्ध्या पुरेचा ने कहा कि सीएसयू , दिल्ली के कुलपति प्रो वरखेड़ी की अध्यक्षता में आयोजित इस रंग महोत्सव के प्रयोग बहुत ही प्रशंसनीय है । डा पुरेचा ने आगे यह भी कहा कि रंगमंच का वैश्विक मूल ग्रन्थ आचार्य भरत लिखित नाट्यशास्त्र संस्कृत में ही लिखा गया है । अतः यह जरुरी है कि भारतीय रंगमंच की पहचान बनाये रखने के लिए संस्कृत भाषा के नाटकों के मंचन पर विशेष ध्यान दिया जाय । भारत सरकार के मार्गदर्शन तथा कुलपति प्रो वरखेड़ी के नेतृत्व में सीएसयू, दिल्ली बहुत ही सार्थक पहल कर रहा है । उन्होंने संबोधित करते कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं ने इस महोत्सव में भारतीय रंग प्रयोग को बड़ा ही जीवंत रुप में प्रस्तुत किया है जिसके लिए वे सभी बधाई के पात्र हैं । केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय इस प्रयोग से न केवल संस्कृत का संबर्धन कर रहा , अपितु भारतीय संस्कृति को भी इन रुपकों के माध्यम से प्रसारित कर रहा है ।

सारस्वत अतिथि तथा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय , वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं में नाट्य कला का बड़ा ही पारखी ज्ञान है । संस्कृत नाटक तथा महाकाव्यों में भारत का इतिहास संन्निहित है । अतः नाट्य मंचन का बहुत ही महत्त्व है ।

देश के जाने माने अनेक कलाविद इस नाट्य प्रतियोगिता के पुरस्कार योजना के निर्णायक मंडल के सदस्य के रुप में उपस्थित रहें । प्रथम स्थान – सदाशिव पुरी ( कृष्णकुतूहलम् ) , द्वितीय स्थान – जयपुर परिसर, राजस्थान (बालचरितम्) तथा गुरुवायूरु परिसर,केरल (सुभद्रा धनंजय) दोनों संयुक्त रुप से तथा नतृतीय स्थान – राजीव गांन्धी परिसर (कंसवध:) तथा वेदव्यास परिसर , हिमाचल प्रदेश (श्रीकृष्णभक्तिचन्द्रिका) दोनों संयुक्त रुप से प्राप्त किया ।साथ ही साथ विशिष्ट पुरस्कार सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, डोग्री, हिमाचल प्रदेश (महावीरचरित्) और कालिकट आदर्श संस्कृत विद्यापीठ ,बालूशेरी,केरल(बालचरितम्)से पुरस्कृत किया गया ।

आज के समापन अवसर पर सदाशिव परिसर, पुरी (कृष्णकुतूहलम्) तथा एकलव्य परिसर ,अगरताला (विख्यातविजयम्) के छात्र छात्राओं ने अपने कलाओं का साकार मंचन किया ।

इस वर्ष के नाट्य प्रयोगों में पुरुषोत्तम राम,देवी सीता तथा श्रीकृष्ण जैसे रामायण, महाभारत तथा पुराणों आदि से जुड़े अनेक आख्यानों को केन्द्र में रखा गया था ।

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