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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य स्थापना दिवस समारोह में 6 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में करेंगे सम्मानित
प्रताप थलवाल ! देहरादून/नई दिल्ली।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक लोकसंगीत को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध लोकगायिका हेमा नेगी करासी को उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान’ के लिए चयनित किया गया है। इस उपलब्धि से उत्तराखंड के लोकसंगीत जगत और प्रदेशवासियों में खुशी की लहर है।
उत्तराखंड शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव राजेंद्र कुमार की ओर से 3 नवंबर 2026 को जारी आधिकारिक पत्र में हेमा नेगी करासी को सम्मान के लिए चयनित किए जाने की सूचना दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सम्मान 6 नवंबर 2026 को प्रातः 9 बजे देहरादून के परेड ग्राउंड में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने हाथों से उन्हें सम्मानित करेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार समारोह में प्रतिभाग करने के लिए हेमा नेगी करासी को राज्य अतिथि घोषित किया गया है। शासन की ओर से उनकी यात्रा एवं कार्यक्रम में सहभागिता के लिए आवश्यक समन्वय की जिम्मेदारी अपर सचिव महावीर सिंह चौहान को सौंपी गई है।
लोकसंगीत के माध्यम से बनाई विशिष्ट पहचान
हेमा नेगी करासी उत्तराखंड की उन प्रतिभाशाली लोकगायिकाओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से गढ़वाली लोकसंस्कृति, पारंपरिक संगीत और पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाई है। उनके गीतों में उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है।
उत्तराखंड गौरव सम्मान के लिए उनका चयन प्रदेश की लोककला, लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
क्या है उत्तराखंड गौरव सम्मान?
उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2021 से प्रारंभ किए गए उत्तराखंड गौरव सम्मान के तहत ऐसे विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यों से प्रदेश का नाम रोशन किया हो, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का गौरव बढ़ाया हो अथवा उत्तराखंड के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
हेमा नेगी करासी को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयनित किया जाना न केवल उनके व्यक्तिगत कला-सफर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और संगीत परंपरा के लिए भी गौरव का विषय है।
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