दिल्ली

सत्ता के दलालों की संस्था मर चुकी है; यह कभी पुनर्जीवित नहीं हो सकतीः उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज कहा कि कि चन्द्रयान-3 का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव सॉफ्ट पावर कूटनीति में भारत का उभरना था। उन्होंने कहा, ‘सॉफ्ट लैंडिंग के समय विश्व के सभी प्रमुख चैनल इस पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे और हमें बधाई दे रहे थे। श्री धनखड़ ने चंद्रयान-3 की सफलता को राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण बताते हुए, कहा कि “हम बड़े चार में शामिल हैं। यह समय की बात है, हम नंबर एक होंगे। पिछला चंद्रयान -2 मिशन को 96 प्रतिशत सफल बताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री के भाव प्रदर्शन की सराहना की, जो इसरो के तत्कालीन निदेशक के पीछे चट्टान की तरह खड़े थे और हमारे वैज्ञानिकों को प्रेरित किया। उपराष्ट्रपति ने आज नई दिल्ली प्रबंधन संस्थान के 25वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों से हमारी शानदार उपलब्धियों पर गर्व करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए। हमारा ग्लास आधा भरा हुआ है और एक दिन यह पूरा भर जाएगा। हमें नकारात्मकता छोड़नी होगी। श्री धनखड़ ने कहा कि विश्व भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक उज्जवल स्थान के रूप में देखता है और अनेक सकारात्मक सरकारी नीतियों के परिणामस्वरूप अब हमारे पास एक ऐसा ईकोसिस्टम है जहां किसी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का पूरी तरह से उपयोग करने का अवसर मिलता है। उन्होंने युवा छात्रों से कहा, “आप अपने सपनों को हासिल कर सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने सत्ता के गलियारे को दलालों से पूरी तरह मुक्त बताते हुए इस बात पर बल दिया कि सत्ता के दलालों की संस्था मर चुकी है। यह कभी पुनर्जीवित नहीं हो सकती। पारदर्शिता और जवाबदेही शासन की पहचान है और अब भ्रष्टाचार का कतई सहन नहीं किया जाएगा। उपराष्ट्रपति ने न्यायिक प्रणाली को बहुत मजबूत बताते हुए कहा कि जब किसी पर कानून के उल्लंघन के लिए मामला दर्ज किया जाता है, तो सड़कों पर उतरने की संस्कृति को खत्म करना चाहिए। श्री धनखड़ ने विधायिका की चर्चा करते हुए जनप्रतिनिधियों के आचरण को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा, ‘राज्यसभा के सभापति के तौर पर मैं बहस, संवाद या चर्चा नहीं देखता। मैं व्यवधान देखता हूं।’ उन्होंने युवाओं से न्यूट्रल गियर से बाहर निकलने, अपनी चुप्पी तोड़ने और इस मुद्दे पर अपने मन की बात कहने का आह्वान किया। उन्होंने बल देते हुए कहा, ‘आपको एक प्रणाली बनानी होगी… जिसमें आप चाहेंगे कि आपका प्रतिनिधि ऐसा आचरण पेश करे जिसका अनुकरण किया जा सके, जो दूसरों को प्रेरित कर सके। श्री धनखड़ ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए एकमात्र सर्वाधिक प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र बताते हुए युवाओं से समाज को वापस देने की अपील की। उन्होंने उत्तीर्ण छात्रों को बधाई देते हुए उनसे कहा, ”कभी भी सीखना बंद नहीं करें… ज्ञान एकत्रित करना कभी बंद नहीं करें।” उपराष्ट्रपति ने संस्थानों के पूर्ववर्ती छात्रों से जुड़ने के लिए एक ढांचागत व्यवस्था का भी आह्वान किया। यह मानते हुए कि हमारे पूर्ववर्ती छात्र प्रतिभा का दुनिया का सर्वाधिक शक्तिशाली, प्रभावशाली भंडार हैं उपराष्ट्रपति ने सभी संस्थानों से पूर्ववर्ती छात्रों का एक राष्ट्रीय परिसंघ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति में उनका योगदान अत्यधिक गुणात्मक हो सकता है। इस अवसर पर एनडीआईएम के बोर्ड निदेशक न्यायमूर्ति बीपी सिंह, भारत सरकार के राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे, एनडीआईएम के अध्यक्ष श्री वीएम बंसल, छात्र, संकाय सदस्य और अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

 

 

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