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सी एम पपनै
भतरौंजखान (उत्तराखंड)। औपनिवेशिक (ब्रिटिश) शासन के खिलाफ हर संघर्ष और आंदोलन का जयघोष करने वाले तथा जाति, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे देश और देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने वाले एवं हमारी मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा, सांस्कृतिक गौरव और देश की महानता का उद्घोष करने वाले व सदैव देश के युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाने वाले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विद्या भारती द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी ‘नमामि भारतम्’ अभियान के अंतर्गत सरस्वती शिशु विद्या मन्दिर भतरौंजखान (अल्मोड़ा) के प्रांगण में 25 सितंबर दिन में 12 बजे स्थानीय कस्बे भतरौंजखान व इर्द-गिर्द ग्रामीण क्षेत्रों के करीब एक सौ पचास विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं जनसमुदाय द्वारा राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् के पूरे छह छन्दो का कर्णप्रिय स्वर में अलौकिक सामूहिक गायन किया गया।
कार्यक्रम का श्रीगणेश आमंत्रित वक्ताओं, स्कूल प्रधानाचार्य व प्रबंधकों के कर कमलों भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित व पुष्पार्चन से किया गया। प्रधानाचार्य हरि सिंह मेहता द्वारा उपस्थित सभी अभिभावकों, स्थानीय व्यापारियों व प्रबुद्ध जनों का स्वागत अभिनंदन करते हुए कहा गया, राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार विकसित करने के साथ-साथ उनके मन-मस्तिष्क में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
राष्ट्रीय गीत गायन वंदे मातरम के इस अवसर पर मुख्य वक्ता विष्णु दत्त पंत तथा अन्य वक्ताओं में जगदीश पाण्डेय, चंद्रेश रावत तथा डॉ.अजय पाण्डेय द्वारा व्यक्त किया गया, वंदे मातरम् की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 150 वर्ष पूर्व की गई थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों में राष्ट्र भावना और स्वतंत्रता की चेतना जगाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना था। रचित इस गीत ने देश वासियों को भारत माता के प्रति अगाध भक्ति, समर्पण और राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करने का संदेश दिया था। इस राष्ट्रीय गीत का मुख्य उद्देश्य देश की प्राकृतिक सुंदरता, उसकी समृद्धि और मातृभूमि के सम्मान को सर्वोपरि रखना रहा है। 
वक्ताओं द्वारा कहा गया, राष्ट्रीय गीत जिसकी आज राष्ट्रीय फलक पर 150वी वर्ष गांठ मनाई जा रही है, स्वतंत्रता संग्राम की अमर चेतना का सबसे शक्तिशाली गीत रहा है। देश की एकता, स्वाभिमान, देशभक्ति की भावना को यह रचित गीत जागृत करता है। अपने संबोधन में वक्ताओं द्वारा कहा गया, वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण की भावना का प्रतीक है। वक्ताओं द्वारा विद्यार्थियों से आह्वान किया गया, आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थी अपनी संस्कृति, संस्कारों और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
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