Views: 0
डॉ. आदित्य नाग ने राजस्थान के राज्यपाल और भूटान के पूर्व शिक्षा मंत्री ल्योंपो ठाकुर सिंह पोवड्येल का किया स्वागत एवं अभिनंदन
Amar sandesh दिल्ली/जयपुर, 10 अक्टूबर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम एंड फेस्टिवल–2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। बिड़ला सभागार में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में प्रसन्नता, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और वैश्विक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। देश-विदेश के शिक्षाविदों, विचारकों, समाजसेवियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विभूतियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
समारोह में राजस्थान के राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम की वरिष्ठ कार्यकारिणी समिति के सदस्य एवं सलाहकार डॉ. आदित्य नाग तथा फोरम के जयपुर चैप्टर के संरक्षक मेजर जनरल अनुज माथुर ने राज्यपाल का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
डॉ. आदित्य नाग ने भूटान के पूर्व शिक्षा मंत्री का किया विशेष सम्मान
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण भूटान के पूर्व शिक्षा मंत्री महामहिम ल्योंपो ठाकुर सिंह पोवड्येल की सहभागिता रही। डॉ. आदित्य नाग ने उनका विशेष स्वागत एवं सम्मान किया। वर्ष 2008 से 2013 तक भूटान की शाही सरकार में शिक्षा मंत्री रहे पोवड्येल शिक्षा, मानवीय मूल्यों और समग्र विकास से जुड़े विचारों के लिए जाने जाते हैं।
इस अवसर पर भूटान की सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस—GNH) की अवधारणा पर भी विशेष चर्चा हुई। इस विचारधारा में विकास को केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर नागरिकों की प्रसन्नता, सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और जीवन की गुणवत्ता से जोड़कर देखा जाता है।
डॉ. आदित्य नाग ने इस अवधारणा को भारतीय दर्शन के ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के आदर्श के अनुरूप बताते हुए कहा कि राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का आकलन उसके नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य, संतोष, सामाजिक सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता से भी किया जाना चाहिए।
‘मानवीय प्रसन्नता ही सभ्यता की वास्तविक प्रगति का मापदंड’
डॉ. आदित्य नाग ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी सभ्यता की महानता केवल आर्थिक संपन्नता, भौतिक उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसके नागरिकों के जीवन में प्रसन्नता, आत्मसम्मान, करुणा और संवेदनशीलता का कितना स्थान है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षा संस्कारों से जुड़ती है, नेतृत्व करुणा से प्रेरित होता है और विकास का उद्देश्य सामूहिक कल्याण बनता है, तभी एक संवेदनशील, समृद्ध और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण संभव होता है। ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम की पहल प्रसन्नता को व्यक्तिगत आकांक्षा से आगे बढ़ाकर सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक संकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।
मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सद्भाव पर हुआ मंथन
महोत्सव के विभिन्न विचार-सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक जीवन-दृष्टि, पारिवारिक संबंधों की मजबूती, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक एकाकीपन और संबंधों से जुड़ी चुनौतियों के बीच प्रसन्नता एवं समग्र कल्याण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
विचार-विमर्श के दौरान शिक्षा संस्थानों, कार्यस्थलों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सार्वजनिक नीतियों में मानसिक स्वास्थ्य तथा नागरिकों के समग्र कल्याण को उचित महत्व देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
भारतीय दर्शन में निहित है विश्व कल्याण का संदेश
डॉ. आदित्य नाग ने भारतीय सनातन दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रसन्नता का संबंध केवल व्यक्तिगत सुख से नहीं, बल्कि संतोष, सेवा, परोपकार, सहअस्तित्व और समस्त सृष्टि के कल्याण से है।
उन्होंने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे शाश्वत विचार संपूर्ण मानवता को सुख, स्वास्थ्य, सहयोग और पारस्परिक सम्मान का संदेश देते हैं। आवश्यकता है कि भारत की इस समृद्ध वैचारिक परंपरा को आधुनिक मनोविज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास की अवधारणाओं के साथ जोड़कर व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाए।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से मजबूत हुआ वैश्विक संवाद
मेजर जनरल अनुज माथुर सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विभूतियों की सहभागिता से महोत्सव में वैश्विक कल्याण और संवेदनशील नेतृत्व से जुड़े विचारों को साझा करने का अवसर मिला। आयोजन का उद्देश्य विभिन्न देशों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना तथा प्रसन्नता को जनजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाना रहा।
महोत्सव ने यह संदेश दिया कि आर्थिक विकास और मानवीय प्रसन्नता एक-दूसरे के पूरक हैं। किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी सार्थक है, जब नागरिकों को सम्मान, सुरक्षा, संतोष और सकारात्मक वातावरण प्राप्त हो।
जयपुर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के माध्यम से विश्व कल्याण, करुणा, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। आयोजन का मूल संदेश रहा प्रसन्न व्यक्ति से प्रसन्न परिवार, प्रसन्न परिवार से समरस समाज और समरस समाज से सुखी एवं शांतिपूर्ण विश्व का निर्माण होता है।
Related