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ख्याति के शिखर पर अग्रसर सामाजिक संस्था ‘उत्तरांचल भ्रात्रि सेवा संस्थान’ का छठा स्थापना दिवस व सम्मान समारोह सम्पन्न

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सी एम पपनैं
नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर मे विगत छह वर्षो के अल्प समय में नि:स्वार्थ सेवाभाव, सद्भाव, सहयोग, संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन तथा विभिन्न प्रकार की मानवीय जन सेवाओ को समर्पित होकर परोपकारी कार्यो के बल अप्रत्याशित तौर पर ख्याति के शिखर पर विराजमान सामाजिक संस्था ‘उत्तरांचल भ्रात्रि सेवा संस्थान’ द्वारा आईटीओ स्थित प्यारे लाल भवन सभागार में संस्था का छठवां भव्य स्थापना दिवस समारोह 19 नवम्बर को संस्थान से जुडे सैंकडो सेवा मित्रों, दिल्ली एनसीआर की अनेकों सामाजिक संस्थाओ से जुड़े प्रबुद्ध समाजसेवियों, संस्कृतिकर्मियों, व्यवसाइयों व पत्रकारों की उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

स्थापना दिवस समारोह का श्रीगणेश मुख्य व विशिष्ट अतिथियों मे प्रमुख शरद पांडे, आर पी मिश्रा, बसंत कांडपाल, डाॅ अतुल पाठक, एस पी जोशी तथा संस्था पदाधिकारियों व सेवा प्रमुखो मे हरदा उत्तरांचली, कुंदन सिंह रावत, प्रेम बल्लभ सती तथा उम्मेद शाह के कर कमलो दीप प्रज्ज्वलन तथा दलीप रावत व घुघुती सांस्कृतिक मंच कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गणेश नृत्य वंदना से किया गया। संस्था पदाधिकारियों व संस्था वरिष्ठ सदस्यों द्वारा मुख्य व विशिष्ट अतिथियों को ‘अति विशिष्ट सेवा रत्न सम्मान’ के तहत अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ, पहाडी टोपी व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

स्थापना दिवस के इस अवसर पर अति विशिष्ट सेवा रत्न सम्मान के साथ-साथ पंच विभूति संस्कृति कला रत्न तथा तपोभूमि सेवा रत्न सम्मान भी प्रदान किए गए। संस्थान की सात शाखाओ बुराडी, विनोद नगर, मोहन गार्डन, खजूरी खास (करावल नगर), हरदेव पुरी, वैशाली (गाजियाबाद), गेवाड घाटी मासी (उत्तराखंड) के साथ-साथ देवभूमि पर्वतीय परिवार परिषद दिल्ली पुलिस, ग्राम उंची विहार विकास समिति मासी (उत्तराखण्ड), कुमाउ समाज सेवा समिति, उत्तराखंड जन कल्याण परिषद, कुमाउ एकता मंच बुराडी इत्यादि इत्यादि तथा संस्थान से जुडे पदाधिकारियों को मुख्य व विशिष्ट अतिथियों के कर कमलो अंगवस्त्र व स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। वर्ष 2017 संस्थान के स्थापना दिवस से वर्तमान तक परोपकार के क्षेत्र मे किए गए असाधारण क्रियाकलापो व मिली सफलता व भावी योजनाओ पर अति प्रभावशाली संदेश परक डाक्यूमैंटरी फिल्म का प्रदर्शन भी इस अवसर पर किया गया।

विशिष्ट अतिथियों व अन्य प्रबुद्धजनो मे सम्मानित होने वालो मे नरेन्द्र सिंह बिष्ट, भगत सिंह रावत, चारु तिवारी, सुरेश मठपाल, अमरचंद, स्वर्ण भारद्वाज, संजय दरमौडा, एस के तोमर, चंद्र मोहन पपनैं, देव सिंह पटवाल, सतीश नेगी, कमला नेगी, पूजा बिष्ट, गोपाल मठपाल,


ललित भाटी, सुरेश बलोदी, कोमल राणा नेगी इत्यादि मुख्य रहे।

यादगार व प्रभावशाली रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन सुप्रसिद्ध संगीतकार नरेन्द्र अजनबी के संगीत निर्देशन व कोमल राणा नेगी के नृत्य निर्देशन में मंचित किए गए। सात घन्टे तक चलायमान स्थापना दिवस समारोह में उत्तराखंड के लोकगीतो मे छपेली, न्योली व जागर गायन के साथ-साथ विचार, भजन व घुघुती सांस्कृतिक मंच कलाकारों द्वारा प्रस्तुत उत्तराखंड अंचल के नृत्य व मां नंदा देवी डोला ने खचाखच भरे सभागार में बैठे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।


नरेन्द्र अजनबी की संगीत की धुनों, मुकेश बकरोला ढोलक, पवन रावत तबला, अरुण तिवारी अक्टापैड व बांसुरी पर सुभाष द्वारा की गई वाद्ययंत्रों पर की गई संगत मे दलीप रावत, बिशन हरियाला, रिंकी बिष्ट, स्वेता मौलेखी, चंद्रमणी चंदन, चेतना जोशी, कोमल रावत, बलबीर राणा, ध्रूव रावत, आनंद कोरंगा, स्वर्ण भारद्वाज, एस के तोमर, पियूष रावत, गोपाल मठपाल, बृजू बिष्ट, पुष्पा पंत, रिया पंत, माही रावत तथा वंछिता पंत द्वारा उत्तराखंड अंचल के लोकगीत व नृत्य तथा कुछ गायको द्वारा भजन व कविता पाठ कर श्रोताओं को गदगद किया, स्थापना दिवस समारोह को गरिमा प्रदान की। आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियो को अंगवस्त्र व स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

उत्तरांचल भ्रात्रि सेवा संस्थान’ द्वारा स्थापना दिवस के इस अवसर पर लोकगायको मे बलवीर राणा, दलीप रावत, विरेन्द्र डंगवाल व रंगकर्म के क्षेत्र मे हेम पंत व के एन पांडे ‘खिमदा’ को ‘पंच विभूति संस्कृति रत्न सम्मान-2023’ से नवाजा गया।

स्थापना दिवस समारोह मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व दिल्ली पुलिस सहायक आयुक्त एस पी जोशी द्वारा व्यक्त किया गया, ‘उत्तरांचल भ्राति सेवा संस्थान’ जो परोपकारी कार्य विगत छह वर्षो से निरंतर प्रत्येक रविवार निगम बोध घाट पर कर रहा है व निरंतर कार्य विस्तार के तहत हिंडन घाट गाजियाबाद व उत्तराखंड के मासी घाट तक अपनी सेवा के माध्यम से अपनी पहचान बना चुका है, यह सब जनभावना से जुड़ा हुआ है। संस्था से जुड़े सेवा मित्र निरंतर गर्मी, सर्दी व बरसात मे नदी किनारे घाट की गन्दगी मे जो कार्य स्वच्छता अभियान चला कर अपना योगदान दे रहे हैं अति प्रेरणा जनक है, प्रशंसनीय है। भविष्य की पीढी को प्रेरणा प्रदान कर रही है।व्यक्त किया गया, हमारी भावना रहे, हम अपने गांवो से भी जुड़े रहे। गांव का भी ध्यान रखे। गांवो मे अनेकों समस्यायें हैं। प्रवास मे रह कर भी, गांव मे रह रहे लोगों की मदद करे। चेतना जगाऐ। गांव के विकास की सोचे। अपनी संस्कृति से लगाव रखे। हमारी संस्कृति की पहचान पूरे वैश्विक फलक पर है।

‘उत्तरांचल भ्राति सेवा संस्थान’ संयोजक व प्रमुख सेवा मित्र हरदा उत्तरांचली द्वारा व्यक्त किया गया 2017 से निरंतर सेवा भाव से जो कार्य सेवा मित्र संस्थान से जुड़ कर कर रहे हैं सभी ने सराहना की है। कोरोना काल मे संस्थान द्वारा किया गया कार्य बडे स्तर पर सराहा गया है। उक्त कार्यो से संस्थान के सेवा मित्रों की संख्या का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। निरंतर उत्तराखंड के जनमानस के मध्य संस्थान के सेवा मित्रों द्वारा किए जा रहे कार्यो की सराहना बडे स्तर पर की जाती रही है, लेकिन हमारी स्थानीय सरकार, केन्द्र सरकार व स्थानीय प्रशासन ठीक उसी प्रकार मौन हैं जिस प्रकार उत्तराखंड के दिल्ली में प्रवासरत तीस-पैंतीस लाख प्रवासियो के उत्थान के लिए हमारी सरकारे हर क्षेत्र मे मौन धारण किए हुए है। सवाल है, कोंन सा कार्य इन स्थापित सरकारो ने उत्तराखंड के प्रवासी लोगों के लिए किया है? मंथन करना जरूरी है।


व्यक्त किया गया, हमारा संस्थान राजनीति नही जन सरोकारों, साफ-सफाई व स्वच्छता मिशन व उत्तराखंड की परंपरागत लोक संस्कृति व परंपराओ पर कार्य कर रहा है। मानवीय सेवा कर रहा है। दुर्भाग्य है उत्तराखंड के प्रवासी जन बिखरे हुए हैं, अपनी भविष्य की पीढी के लिए चिंतित नहीं है। हरदा उत्तरांचली द्वारा आहवान किया गया सब प्रवासी उत्तराखण्डियों को जागरूक होकर आगे आकर हर क्षेत्र मे अपना हक अख्तियार करना होगा, सम्मान प्राप्त करना होगा, यह तभी संभव होगा जब सब एक लक्ष्य, एक आवाज व कन्धे से कंधा मिलाकर चलेगें, एक दूसरे की मदद करेगें। स्थापित सरकारों को भी चाहिए उत्तराखंड के लोगों के लिए भी कुछ सोचे!

आयोजित स्थापना समारोह का प्रभावशाली मंच संचालन संस्थान सदस्य मानवेन्द्र मनराल, दलीप रावत तथा मनोज गौतम द्वारा बखूबी किया गया।
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