राष्ट्रीय

“खेत से किसान तक सुरक्षा की पहल, फसल बीमा के जरिए कृषि जोखिमों को कम करने में जुटी AIC

डॉ.लावण्या मुंडयूर के नेतृत्व में किसान जागरूकता, तकनीक और फसल बीमा व्यवस्था को मजबूत करने पर AIC का जोर

 

अमर चंद्र/ हेना पांडे

नई दिल्ली। खेती-किसानी प्रकृति और मौसम की अनिश्चितताओं से सीधे जुड़ी है। सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, असमय बारिश, कीट और फसल रोग जैसी परिस्थितियां किसानों की महीनों की मेहनत पर असर डाल सकती हैं। ऐसे समय में फसल बीमा किसानों को आर्थिक जोखिम से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) किसानों को फसल बीमा से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी है। वर्तमान में लावण्या मुंडयूर कंपनी की चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) हैं।  उनके नेतृत्व में कम्पनी बीमा व्यवस्था को मजबूत कर रहीहै‌

किसान तक पहुंच बनाने पर जोर

फसल बीमा का उद्देश्य केवल पॉलिसी उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि किसानों को जोखिम, बीमा कवरेज, प्रीमियम, दावा प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में किसान जागरूकता कार्यक्रमों और क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को अधिसूचित फसलों के लिए विभिन्न प्राकृतिक जोखिमों से बीमा सुरक्षा मिलती है। इनमें सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, कीट एवं रोग, जलभराव और कुछ निर्धारित परिस्थितियों में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान जैसे जोखिम शामिल हैं।

तकनीक से बदल रहा फसल नुकसान का आकलन

फसल बीमा व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। YES-TECH (Yield Estimation System based on Technology) और WINDS (Weather Information Network and Data System) जैसी तकनीकी पहलें फसल उपज और मौसम संबंधी आंकड़ों के उपयोग को मजबूत कर रही हैं।

सरकार के अनुसार इन तकनीकों से फसल नुकसान के आकलन और बीमा दावों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिल रही है।

करोड़ों किसान और लाखों करोड़ रुपये के दावे

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़े बताते हैं कि फसल बीमा का दायरा लगातार बढ़ा है। खरीफ 2016 से रबी 2025-26 तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित किए गए, जबकि 26.33 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों पर ₹2.06 लाख करोड़ से अधिक के दावों का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार खरीफ 2026 में 27 अगस्त 2026 तक 241.38 लाख किसानों को बीमा कवरेज मिला था, जबकि बीमित क्षेत्र 278.12 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका था।

महिला किसानों को भी जोड़ा जा रहा है

AIC ने 2026 में ‘कृषि सखी’ पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य महिला किसानों में कृषि और फसल बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। इसके तहत क्षेत्रीय स्तर पर कार्यशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

विकसित भारत 2047 में कृषि सुरक्षा की भूमिका

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में मजबूत और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसानों की आय और आजीविका को मौसम एवं प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जोखिमों से सुरक्षित करना इसी दिशा का एक अहम हिस्सा है।

फसल बीमा किसानों को नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहारा उपलब्ध कराने के साथ खेती में जोखिम प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करता है। तकनीक, बेहतर डेटा, डिजिटल व्यवस्था और किसान जागरूकता के माध्यम से इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

AIC की ओर से किसान केंद्रित गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि फसल बीमा की जानकारी गांव और खेत तक पहुंचे और पात्र किसान उपलब्ध बीमा सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

किसान की मेहनत और उसकी फसल की सुरक्षा, कृषि क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में फसल बीमा केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम ही नहीं, बल्कि बदलते मौसम और कृषि जोखिमों के दौर में किसानों की मजबूती का एक महत्वपूर्ण साधन बन रहा है।

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