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अमर चंद्र
नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत हरि हर मिश्रा अपने कुशल प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन की गहरी समझ और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण देश के बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मार्च 2026 के अंत में मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद उन्होंने अप्रैल 2026 में इस पद का कार्यभार संभाला।
श्री हरि हर मिश्रा 1998 बैच के भारतीय रक्षा लेखा सेवा (Indian Defence Accounts Service-IDAS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। प्रशासन, लोक वित्त और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उनके पास लगभग तीन दशक का समृद्ध अनुभव है। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पुरातत्व विषय में स्नातकोत्तर तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (NIFM), फरीदाबाद से एमबीए (फाइनेंस) कर चुके हैं। अपने लंबे प्रशासनिक कार्यकाल में उन्होंने केंद्र सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है और वित्तीय प्रशासन में अपनी दक्षता का परिचय दिया है।
वित्तीय सेवा विभाग में उन्हें बैंकिंग ऑपरेशंस-II (BO-II) तथा फाइनेंशियल सर्विसेज कस्टमर एक्सीलेंस (FSCE) जैसे महत्वपूर्ण प्रभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह विभाग सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, वित्तीय संस्थानों, बैंकिंग सुधारों, वित्तीय समावेशन तथा बैंकिंग नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
श्री मिश्रा ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब देश का बैंकिंग क्षेत्र डिजिटल परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, ग्राहक-केंद्रित सेवाओं, वित्तीय समावेशन और तकनीक आधारित बैंकिंग व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली से विभाग को नई ऊर्जा मिली है तथा बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के प्रयासों को गति मिल रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत–2047” के संकल्प को साकार करने में मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन, डिजिटल बैंकिंग के विस्तार, आम नागरिकों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यकुशलता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में वित्तीय सेवा विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में हरिहर मिश्रा जैसे अनुभवी और दूरदर्शी अधिकारी का नेतृत्व देश के बैंकिंग क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ विकसित भारत के लक्ष्य को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अपने शांत, परिणामोन्मुख और समन्वयकारी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले हरिहर मिश्रा प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय अनुशासन का ऐसा उदाहरण हैं, जिनसे बैंकिंग क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव और संस्थागत मजबूती की अपेक्षा की जा रही है।
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