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Amar sandesh नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की शिक्षा को आर्थिक मजबूती देने के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना (PMS) तथा अनुसूचित जातियों एवं अन्य के लिए पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का प्रभावी संचालन कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उनकी पढ़ाई को निर्बाध जारी रखना, शैक्षणिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
लोकसभा में सांसद नवासकनी के. के प्रश्न के लिखित उत्तर में रामदास अठावले ने बताया कि मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना को वर्ष 2020-21 में तथा पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को वर्ष 2021-22 में संशोधित किया गया। इन सुधारों के बाद छात्रवृत्ति राशि के वितरण में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत पात्र विद्यार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति की राशि सीधे जमा की जाती है। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनी है।
राज्य मंत्री ने बताया कि मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां 1,930.38 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई थी, वहीं यह बढ़कर 2025-26 में 6,186.96 करोड़ रुपये हो गई है। हाल के वर्षों में इस योजना से प्रतिवर्ष लगभग 48 लाख अनुसूचित जाति के विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 48,04,208 छात्रों को 5,562.23 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के माध्यम से छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
रामदास अठावले ने यह भी बताया कि पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत भी सरकार लगातार लाखों छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2025-26 में इस योजना से 26,79,049 विद्यार्थियों को लाभ मिला। वर्ष 2022-23 से इस योजना में भी डीबीटी प्रणाली लागू होने के बाद छात्रवृत्ति वितरण अधिक पारदर्शी और प्रभावी हुआ है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छात्रवृत्ति योजनाओं के दायरे का विस्तार करने, आर्थिक सहायता बढ़ाने तथा तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य सामाजिक न्याय को मजबूत करते हुए देशभर के पात्र विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान अवसर उपलब्ध कराना है।
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