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दिल्ली-एनसीआर में बदतर वायु स्थिति: नवंबर रहा सबसे प्रदूषित महीनों में
Amar sandesh नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की हवा नवंबर माह में भी दमघोंटू बनी रही। थिंक टैंक ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली प्रदूषण स्तर के आधार पर देश में चौथे स्थान पर रहा। रिपोर्ट में बताया गया कि नवंबर में दिल्ली का मासिक औसत पीएम 2.5 स्तर 215 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, जो अक्तूबर के 107 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की तुलना में लगभग दोगुना है।
रिपोर्ट के अनुसार नवंबर के दौरान दिल्ली का एक्यूआई 23 दिन ‘बहुत खराब’, 6 दिन ‘गंभीर’ और 1 दिन ‘खराब’ श्रेणी में रहा। इस अवधि में पराली जलाने का योगदान कुल प्रदूषण में सिर्फ 7 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 20 प्रतिशत था। इसके बावजूद प्रदूषण स्तर में कमी नहीं आई।
एनसीआर के अन्य शहर,बहादुरगढ़, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा,में भी हवा का स्तर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर दर्ज किया गया। सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार के अनुसार, पराली जलाने में कमी होने के बावजूद परिवहन, उद्योग, पावर प्लांट एवं अन्य स्रोतों से होने वाला वर्षभर का उत्सर्जन हवा की गुणवत्ता को निरंतर खराब बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि इन स्रोतों से उत्सर्जन कम किए बिना हवा सुरक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकती।
इसी बीच राजधानी में हवा की गति सुस्त रहने से प्रदूषण में और इजाफा दर्ज किया गया। शनिवार सुबह धुंध और हल्के कोहरे के साथ स्मॉग की परत दिखाई दी, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हुई। लोग मास्क पहनने को मजबूर दिखे और सांस के मरीजों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ा।
दिल्ली में शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 330 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। शुक्रवार की तुलना में इसमें तीन अंकों की बढ़ोतरी हुई। वहीं एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही, जहां एक्यूआई 344 दर्ज किया गया।
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