उत्तराखण्ड

दो दिवसीय बालीबाल प्रतियोगिता में टीम कुमाल्डी का दबदबा, खिताब पर कब्जा

अमर चंद्र

दिल्ली,/ देहरादून। रिखणीखाल विकास समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय बालीबाल प्रतियोगिता उत्साह, रोमांच और खेल भावना के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। प्रतियोगिता में 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में टीम कुमाल्डी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया, जबकि 45 वर्ष से कम आयु वर्ग में कुमाल्डी (मंदाकिनी क्लब) की टीम ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए उपविजेता स्थान प्राप्त किया।

45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें टीम कुमाल्डी ने अनुभव, संयम और बेहतरीन तालमेल का परिचय देते हुए विरोधी टीम को कड़े संघर्ष में पराजित किया। विजेता टीम कुमाल्डी के कप्तान बृजमोहन सिंह नेगी के नेतृत्व में राजेंद्र सिंह रावत, रविंद्र रावत, मदन सिंह नेगी, नरेंद्र सिंह रावत, मनमोहन सिंह नेगी, धनपाल सिंह रावत एवं पपेंद्र सिंह नेगी ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। इस आयु वर्ग में टीम कोच सतीश घंडियाल एवं टीम मैनेजर वीरेंद्र सिंह नेगी रहे, जिनके मार्गदर्शन में टीम ने खिताबी जीत दर्ज की।

वहीं 45 वर्ष से कम आयु वर्ग में टीम कुमाल्डी (मंडाकिनी क्लब) ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल में कड़े मुकाबले के बाद उपविजेता रही। इस वर्ग में टीम का नेतृत्व महावीर सिंह रावत (टीम कप्तान) ने किया। टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी पूरे आयोजन में सराहनीय खेल दिखाया। इस आयु वर्ग में टीम कोच गिरीश घंडियाल एवं टीम मैनेजर शिव दयाल सिंह नेगी रहे, जिनके कुशल मार्गदर्शन में टीम फाइनल तक पहुंची।

प्रतियोगिता का आयोजन बलूनी पब्लिक स्कूल के खेल मैदान में किया गया, जिसमें क्षेत्र की कई टीमों ने प्रतिभाग किया। फाइनल मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे और हर अंक पर तालियों से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहे।

समापन अवसर पर विशिष्ट अतिथि समाजसेवी खुबीर बिष्ट तथा बलूनी पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी ने विजेता एवं उपविजेता टीमों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय समाज में भाईचारे, एकता और खेल संस्कृति को भी मजबूत करती हैं।

रिखणीखाल विकास समिति के अध्यक्ष हीरा सिंह नेगी ने बताया कि बालीबाल इस क्षेत्र का पारंपरिक खेल है और समिति पिछले कई वर्षों से इस प्रतियोगिता का नियमित आयोजन कर रही है, ताकि बच्चों से लेकर वरिष्ठ खिलाड़ियों तक को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके और खेल भावना को आगे बढ़ाया जा सके।

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