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लंबित मामलों पर सख्ती: वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने डीआरटी-डीआरएटी को दिया ‘स्पीड मंत्र’, डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी वसूली”

विज्ञान भवन में संगोष्ठी तेजी से निपटारे, उच्च मूल्य मामलों की प्राथमिकता और ई-फाइलिंग पर जोर

अमर चंद्र

नई दिल्ली। ऋण वसूली से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने शनिवार को विज्ञान भवन में ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरएटी) के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की। इस दौरान वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली में तेजी लाने और लंबित मामलों को कम करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश दिए।

संगोष्ठी में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय बैंक संघ के सदस्यों ने भाग लिया। अपने संबोधन में एम. नागराजू ने कहा कि न्यायाधिकरणों को बेहतर प्रदर्शन करने वाले डीआरटी के सफल मॉडलों को अपनाना चाहिए, ताकि मामलों के निपटारे की गति और वसूली की दर दोनों में सुधार हो सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों से डीआरटी की मासिक निपटान दरों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। अब जरूरत है कि इन सुधारों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।
संगोष्ठी में डिजिटलीकरण को न्यायिक सुधारों की रीढ़ बताते हुए सचिव ने अनिवार्य ई-फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई और ई-डीआरटी 2.0 जैसे प्लेटफॉर्म के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल से पारदर्शिता और दक्षता दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
चर्चा के दौरान बैंकों के भीतर निगरानी और पर्यवेक्षण तंत्र को मजबूत करने, उच्च मूल्य वाले मामलों को प्राथमिकता देने और लोक अदालतों के माध्यम से त्वरित निपटान जैसे उपायों पर भी सहमति बनी। साथ ही, लंबित मामलों को कम करने के लिए मध्यस्थता के विकल्प को अपनाने का सुझाव दिया गया।
नए ‘बैंकनेट’ ई-नीलामी प्लेटफॉर्म को परिसंपत्तियों की बेहतर दृश्यता और मूल्य प्राप्ति में सहायक बताया गया। अधिकारियों ने माना कि इससे वसूली प्रक्रिया को और अधिक गति मिलेगी।
वित्तीय सेवा विभाग ने दोहराया कि वह एक मजबूत, पारदर्शी और कुशल न्यायिक ढांचा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह की संगोष्ठियां नीतिगत संवाद और सुधारों को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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