संत शेरसिंह की पुण्यतिथि पर रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की

डॉ. हंसराज सुमन को अवैतनिक डायरेक्टर बनाया गया

दिल्ली।दिल्ली देहात के गाँव लिबासपुर में जन्में संत श्री शेरसिंह जी के 33 वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर उनके परिजनों एवं सहयोगियों तथा उनसे प्रभावित सज्जनों के सहयोग से बुधवार को कबीर बस्ती लिबासपुर में संत शेरसिंह रिसर्च एंड एजुकेशन फाउंडेशन नामक ट्रस्ट की स्थापना की गई । स्थापना से पूर्व संत शेरसिंह को उनके परिजनों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की । फाउंडेशन का अवैतनिक डायरेक्टर प्रोफेसर हंसराज सुमन को बनाया गया है , इसके अलावा श्रीमती सरिता सुमन , कु. पल्लवी प्रियदर्शिनी , श्री प्रसून पाटिल व श्री उत्कर्ष को फाउंडेशन में रखा गया है ।

डायरेक्टर प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि इस फाउंडेशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य संत शेरसिंह द्वारा समाज के शोषित ,वंचित किंतु प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं किसी भी क्षेत्र के प्रतिभा सम्पन्न बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करने के सपनों को प्रत्यक्ष रूप देने के लिए की गई है ।उन्होंने बताया है कि संत शेरसिंह संत कबीर के सच्चे अनुयायी में से एक थे और कबीर द्वारा रचित साखी , शब्द को गाने वाले थे । वे कबीर की समाज सुधार दृष्टि से अत्यंत प्रेरित थे । समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने में जिस तरह से कबीर का योगदान रहा है उसी तरह से संत शेरसिंह भी समाज में फैली विसंगति , छुआछूत , जातिप्रथा , धार्मिक आडंबर , हिंसा तथा भृष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाते रहते थे । उनका सपना था कि समाज में सौहार्द्रता और समानता होनी चाहिए , वे किसी भी तरह के पाखंडवाद में विश्वास नहीं करते थे , समाज में आपसी वैमनस्यता को भी दूर करना चाहते थे ।

प्रोफेसर सुमन ने बताया कि संत शेरसिंह का मानना था कि मनुष्य का जन्म एक पवित्र वरदान की तरह है जिसे समाज के आडम्बरों ने कलुषित कर दिया है और यह मलिनता तभी दूर हो सकती है जब व्यक्ति ज्ञान की आराधना करें और स्व को पहचाने । उनका कहना था कि स्व की पहचान मनुष्यता की पहली पहचान है और वह तभी हो सकती है जब व्यक्ति के पास ज्ञान हो लेकिन वह ज्ञान ऐसा न हो जो सिर्फ पुस्तकीय हो बल्कि उसका उद्देश्य प्रत्यक्ष रूप से मानव सेवा और समाज सुधार के लिए होना चाहिए । इसलिए वे सोचते थे कि हमारे समाज में एक बहुत बड़ा वर्ग ज्ञान से वंचित है और जब तक उसे वह प्राप्त नहीं होगा तब तक मानवतापूर्ण समाज की स्थापना नहीं की जा सकती । इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही उन्हीं के नाम पर और उनके उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इस फाउंडेशन की स्थापना की गई है ।

फाउंडेशन की सदस्य श्रीमती सरिता सुमन ने बताया है कि इस रिसर्च फाउंडेशन के अंतर्गत समाज में किन्हीं कारणों से पिछड़ गए बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत उनको शिक्षा प्रदान करना , विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभा सम्पन्न बनाना , स्त्री शिक्षा को ध्यान में रखते हुए बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देना , मजदूर , किसानों के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करके उच्च शिक्षा तक पहुंचाना , दूर-दराज के दुर्गम इलाकों में रहने वाले , जनजातीय इलाकों से सम्पर्क करके उनके बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करना । श्रीमती सुमन का कहना है कि दलितों के उद्धार के लिए शिक्षण -प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यक्रम चलाना एवं उनको उनका अधिकार दिलाना आदि ऐसे कार्यक्रम है जो इस फाउंडेशन द्वारा सम्पन्न किए जाएंगे । उन्होंने बताया है कि इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा के मद्देनजर उपरोक्त विषयों पर शोध कार्य भी सम्पन्न किए जाएंगे । शोधार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी । साथ ही सरकार द्वारा दलित , पिछड़ों के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रमों के अंतर्गत उपलब्ध छात्रवृत्ति प्रदान करने में सहयोग प्रदान करना भी इसका लक्ष्य होगा ।

इस अवसर पर उनके परिवार के सदस्यों के अलावा बहुत से लोग शामिल हुए । सभी ने संत शेरसिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी ।

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