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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक सहयोग, आर्थिक विकास, नवाचार और सतत विकास पर जोर; भारत की अध्यक्षता में नए दौर की साझेदारी की पहल
नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन के साथ भारत एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हो रहे इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। सरल शब्दों में इसका उद्देश्य ऐसी साझेदारी को मजबूत करना है, जिसमें देश संकटों का मजबूती से सामना करें, नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा दें, आपसी सहयोग बढ़ाएं और विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें।
20 साल का हुआ ब्रिक्स, बढ़ी वैश्विक भूमिका
ब्रिक्स के दो दशक पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। पिछले वर्षों में यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर सामने आया है।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स को आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ तकनीक, सुरक्षा, सतत विकास और आम लोगों से जुड़े विषयों के साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया है।
आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर भी भारत का जोर
भारत की अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि ब्रिक्स सहयोग को केवल उच्चस्तरीय बैठकों तक सीमित न रखते हुए समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। देश के विभिन्न शहरों में ब्रिक्स से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इससे भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अंतिम उद्देश्य आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना और विकास के अवसरों को व्यापक बनाना होना चाहिए।
अर्थव्यवस्था से लेकर तकनीक और सुरक्षा तक चर्चा
ब्रिक्स के मंच पर आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग के साथ-साथ व्यापार, निवेश, नई तकनीक, नवाचार, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में चर्चा हो रही है।
भारत के लिए तकनीक और नवाचार विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। तेजी से बदलती दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे विषय आने वाले समय में वैश्विक सहयोग के महत्वपूर्ण आधार बनने वाले हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन के साथ द्विपक्षीय बैठकों का भी दौर
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें भी कर रहे हैं। इन बैठकों में भारत के व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर को अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद से भी ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान अलग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की
भारत-UAE आर्थिक संबंधों के लिहाज से भी सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। UAE की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने ओडिशा में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर की एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना में निवेश की घोषणा की है।
इसे भारत के एल्युमिनियम क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा एकीकृत निवेश बताया गया है। इससे ओडिशा के वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित होने की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं।
नई दिल्ली से वैश्विक सहयोग का संदेश
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसकी कूटनीतिक सक्रियता को रेखांकित करता है। भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाए और वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभावी बनाया जाए।
नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन केवल देशों के नेताओं की बैठक नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में सहयोग, विकास, तकनीक और साझा जिम्मेदारी के नए रास्ते तलाशने का महत्वपूर्ण अवसर भी है।
रिपोर्ट : अमर चंद आधिकारिक जानकारी के आधार पर
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