स्वस्थ समाज ही चौमुखी विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है——डॉ़ सत्येंद्र सिंह

दिल्ली।उत्तराखंड के लोग देश विदेश में अपनी मेहनत लगन व सच्चाई अच्छाई व ईमानदारी से अपने कार्यो का लोहा मनाते दिख रहे हैं। कुदरत ने जहां एक ओर देवभूमि में खूबसूरती की छटा बिखेरी है , वहीं दूसरी तरफ यहां के लोग भी देश विदेश में अपनी मेहनत और लगन से अपने प्रदेश का नाम देश का नाम रोशन करते दिख रहे हैं।

इस समय देश के उच्च स्तरीय पदों पर देवभूमि उत्तराखंड के लोगों का परचम लहरा रहा है ‌इसमें दिल्ली एनसीआर की कई सामाजिक संस्थाएं व कई विभूतियां देश हित के साथ -साथ उत्तराखंड में भी कई सामाजिक कार्य कर रहे हैं । इनमें से कई भारत सरकार में उच्च स्तर के पद पर कार्य करते हुए समाज सेवा का बहुत बड़ा काम भी कर रहे हैं , इनमें से एक चर्चित नाम उत्कर्ष योग के जरिए स्वास्थ्य शिक्षा संस्कार व व्यवहार के सतत आनलाइन आफलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से स्वास्थ्य और सद्विचार देकर लोगों को जागरूक और रोग मुक्त नशामुक्त कर रहे डॉ सत्येन्द्र सिंह हैं। उत्कर्ष योग मिशन के संस्थापक डॉक्टर सत्येन्द्र सिंह जो मूल रूप से देव भूमि उत्तराखंड के निवासी है। एक बुद्धजीवी ,कर्मठ मृदुभाषी मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति हैं। वे अपनी सेवा के साथ-साथ समाज व समाज में अशिक्षा को दूर करने के लिए अपनी इस संस्था के द्वारा जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं ।आप निशुल्क योग शिविर कार्यक्रमों के माध्यम से देश विदेश में लाखों लोगों में सकारात्मक ला रहे हैं । तथा इस मिशन को पूरा करने लिए रात दिन कार्य कर रहे हैं। डॉ सिंह से जब अमर संदेश संवाददाता ने बात चीत की तो उन्होंने कहा कि मेरे जीवन का मकसद है कि समाज में स्वास्थ्य शिक्षा और संस्कार व व्यवहार को सुनिश्चित करने के लिए योग विधा को प्रत्येक घर-घर में पहुंचाया जाए जिससे हम आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ समाज दे सकें। उनका मानना है कि अपने लिए तो जीवन में अवश्य ही कुछ करना चाहिए परन्तु देश हित में समाज के लिए कुछ क्षण और कुछ पल लगाकर कुछ सामाजिक कार्य करने से जो खुशी एवं संतुष्टि मिलती है वह अतुलनीय होती है। इससे हमारे अंदर राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होने लगती है। उनका यह भी मानना है कि राष्ट्र के चहुमुखी विकास में हम सबकी कुछ न कुछ भूमिका अवश्य होनी चाहिए। इससे हमारी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी वे हमारी सभ्यता व संस्कृति आगे बढ़ाने में सहायक होंगे। हमारे पूर्वजों की धरोहर को संभालने और संवारने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षा संस्कार व व्यवहार को एक अंतरराष्ट्रीय मिशन के रूप में लिया है।और देश विदेश से इस मिशन में लोग शामिल हैं रहे हैं। उन्होंने इस बात विशेष बल दिया कि स्वस्थ समाज ही चहुमुखी विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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