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“एकता की मिसाल बना ग्राम कुमाल्डी: प्रवासी मिलकर करेंगे विकास की पहल”
अमर चंद्र
कोटद्वार/पौड़ी गढ़वाल।
आधुनिक समय में पलायन केवल मजबूरी नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और बेहतर शिक्षा की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बन चुका है। देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोग जहां अपने जीवन स्तर को सुधार रहे हैं, वहीं अपने मूल गांव से जुड़ाव भी बनाए रखने की भावना लगातार मजबूत हो रही है। इसी सोच को साकार करने की एक सराहनीय पहल देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के ग्राम कुमाल्डी के प्रवासियों ने की है।

कोटद्वार में रह रहे ग्राम कुमाल्डी के प्रवासी निवासियों ने आपसी संवाद और गांव के विकास के उद्देश्य से एक व्हाट्सएप समूह का गठन किया है। इस समूह का उद्देश्य न केवल गांव के विकास की योजनाओं पर चर्चा करना है, बल्कि गांववासियों के बीच आपसी मेलजोल, सहयोग और सुख-दुख की साझेदारी को भी सशक्त बनाना है।
इसी क्रम में एक विचार गोष्ठी का आयोजन 29 मार्च (रविवार) को सायं 4:00 बजे कोटद्वार में पूर्व प्रधानाचार्य रमेश चंद्र घिल्डियाल के निवास देवी रोड पर निर्धारित किया गया है।इस बैठक में गांव और प्रवासियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।
गांव को विकास की नई दिशा देने की योजनाएं
युवाओं को रोजगार के प्रति जागरूक करना
प्रवासी और स्थानीय ग्रामीणों के बीच समन्वय बढ़ाना
आपसी सुख-दुख में सहभागिता और सहयोग की भावना को मजबूत करना।
ग्राम कुमाल्डी, जो कि मदाल घाटी के मध्य स्थित एक अत्यंत सुंदर और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर गांव है, दो ओर से नदियों, घने जंगलों और शांत घाटियों से घिरा हुआ है। यहां प्रकृति खूबसूरती बिखरी हुई है, एक समय यहां की मुख्य जीविका खेती पर आधारित थी, लेकिन बदलते समय और रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन बढ़ा है।
फिर भी, इस गांव की विशेषता इसकी अटूट एकता और अपनेपन की भावना है। प्रवासी लोग आज भी अपने गांव के विकास और जुड़ाव को लेकर गंभीर हैं और यही भावना इस पहल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
यह पहल न केवल ग्राम कुमाल्डी के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि उन सभी गांवों के लिए एक उदाहरण है जहां से लोग रोजगार की तलाश में बाहर गए हैं, लेकिन अपने मूल से जुड़े रहने का संकल्प नहीं छोड़ा।
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