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Amar sandesh नई दिल्ली। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा है कि राजभाषा हिंदी केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा, राष्ट्रीय एकता और जन-जन की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है।
कौशल भवन, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बहुभाषी भारत में हिंदी एक सेतु के रूप में कार्य करती है, जो विविधताओं को जोड़ते हुए संवाद को सरल और प्रभावी बनाती है।
केंद्रीय मंत्री श्री रेड्डी ने कहा कि हिंदी को अपनाना हमारी जड़ों से जुड़ने का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में हिंदी को विज्ञान, तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी सशक्त रूप से स्थापित करना समय की मांग है।
उन्होंने कोयला मंत्रालय द्वारा हिंदी के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के बढ़ते उपयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी की उपलब्धता और तकनीकी शब्दावली के सरलीकरण जैसे कदम सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
श्री रेड्डी ने स्पष्ट किया कि हिंदी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के साथ सामंजस्य में ही संभव है और सभी भाषाएं देश की साझा सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और अधिकारियों से आह्वान किया कि वे राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण दायित्व मानते हुए हिंदी को प्रशासन के साथ-साथ जन-जन की भाषा के रूप में और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें।
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