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संगठन के समर्पित कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और सांसद तक का सफर, आज भी जनहित के मुद्दों पर बेबाकी से रखते हैं अपनी बात
अमर चंद्र
दिल्ली।देवभूमि उत्तराखंड ने देश को अनेक ऐसे जननेता दिए हैं जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का संकल्प बनाया। त्रिवेंद्र सिंह रावत उन्हीं नेताओं में से एक हैं, जिनकी पहचान एक सादगीपूर्ण, अनुशासित, स्पष्टवादी और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता के रूप में रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव, झारखंड के प्रभारी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और आज हरिद्वार के लोकसभा सांसद तक का उनका राजनीतिक सफर संगठन, संघर्ष और सेवा की मिसाल माना जाता है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल सरकार का पक्ष रखने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी ही सरकार के सामने भी बेबाकी से अपनी बात रखने का साहस रखते हैं। संसद हो या सार्वजनिक मंच, वे उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति, पर्यावरण और जनता के अधिकारों से जुड़े विषयों पर मुखर रहते हैं।
हाल के दिनों में अयोध्या के राम मंदिर और बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामलों पर भी उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आस्था के केंद्रों की गरिमा और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता तथा दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिये।
इसी प्रकार, लोकसभा में भी वे उत्तराखंड के हितों से जुड़े विषयो विशेषकर खनन, पर्यावरण संरक्षण, गंगा, चारधाम यात्रा, पर्वतीय विकास, रोजगार और आधारभूत संरचना पर लगातार अपनी बात मजबूती से रखते रहे हैं। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
20 दिसंबर 1960 को पौड़ी गढ़वाल के एक साधारण परिवार में जन्मे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। युवावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में संगठन को मजबूत किया। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
वर्ष 2002 में डोईवाला से विधायक बनने के बाद वे कृषि मंत्री रहे और मार्च 2017 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। अपने कार्यकाल में उन्होंने पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, डिजिटल गवर्नेंस, ग्रामीण विकास, सड़क और आधारभूत ढांचे के विस्तार सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने चारधाम यात्रा व्यवस्था और तीर्थ स्थलों के बेहतर प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी।
2024 में हरिद्वार से लोकसभा सांसद बनने के बाद भी उनकी सक्रियता पहले जैसी ही बनी हुई है। संसद के भीतर और बाहर वे उत्तराखंड की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। चाहे प्रदेश के धार्मिक स्थलों की गरिमा का प्रश्न हो, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा का विषय हो या जनता की समस्याएं त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी स्पष्ट और निर्भीक कार्यशैली के कारण अलग पहचान रखते हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में उनकी छवि एक ऐसे जनप्रतिनिधि की है जो पद से अधिक जनहित, संगठन और देवभूमि की अस्मिता को महत्व देते हैं। समर्थकों का मानना है कि वे आज भी उत्तराखंड की आवाज़ को पूरे देश के सामने उसी दृढ़ता से रखते हैं, जिसके लिए उनकी पहचान बनी है।
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