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अमर चंद्र
दिल्ली।देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि मुख्यमंत्री चुनाव अलग-अलग सीटों से लड़ते रहे हैं और आंतरिक खींचतान भी समय-समय पर देखने को मिलती रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी बीच आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने रुख को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है।
पार्टी नेतृत्व की ओर से संकेत मिले हैं कि चुनाव मुख्यमंत्री
पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इस घोषणा के बाद पार्टी के भीतर सक्रिय अन्य संभावित दावेदारों की उम्मीदों को झटका माना जा रहा है।
पार्टी के शीर्ष स्तर पर यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में उल्लेखनीय कार्य किया है। सरकार की कोशिश रही है कि पहाड़ी और सीमांत इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं का विस्तार हो।
ज्ञात हो कि जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश और जनहित में फैसले लेते रहे हैं, वह एक कुशल प्रशासक की पहचान माना जाता है। उन्होंने कई ऐसे निर्णय लिए हैं जो सीधे तौर पर युवाओं, आम जनता और प्रदेश के समग्र विकास के हित में रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP नेतृत्व एक बार फिर स्थिरता और निरंतरता के मुद्दे पर चुनावी रणनीति बना रहा है। धामी के चेहरे पर चुनाव लड़ने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे पार्टी संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हालांकि, राज्य की राजनीति में आंतरिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अपने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखते हुए चुनावी मैदान में किस तरह उतरती है।
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