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प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के 65वे जन्मोत्सव पर रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट व सीडीएस जनरल अनिल चौहान द्वारा दिया गया प्रभावशाली व्याख्यान

सी एम पपनै

नई दिल्ली। देश के प्रथम सीडीएस स्व.जनरल बिपिन रावत के 65वे जन्मोत्सव के अवसर पर 16 मार्च की सांय इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हिलमेल फाउंडेशन तथा प्रभात प्रकाशन की ओर से द्वितीय मैमोरियल व्याख्यान ‘तीनों सेनाओ के एकीकरण मे जनरल बिपिन रावत की भूमिका’ विषय पर आयोजित किया गया। आयोजन का श्रीगणेश केन्द्रीय रक्षा एव पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट तथा चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के कर कमलो दीप प्रज्वलित कर व स्व.बिपिन रावत के चित्र पर गुलाब की पंखुडिया अर्पित कर किया गया। आयोजकों द्वारा मुख्य वक्ताओ अजय भट्ट व अनिल चौहान को पुष्पगुच्छ व शाल ओढा कर अभिनंदन स्वागत किया गया।

चिफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान द्वारा व्याख्यान के विषय पर बोलते हुए व्यक्त किया गया, तीनों सेनाओ के एकीकरण मे जनरल बिपिन रावत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण व प्रभावशाली रही। वे देश व अपने काम के प्रति ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ थे। नेतृत्व के गुण उनमे कूट-कूट कर भरे हुए थे। उनका ज्ञान अद्भुत व दिशा तर्क संगत व प्रभावशाली थी। वरिष्ठ अधिकारियों को वे समय-समय पर गाइड करते रहते थे। सेना का मनोबल बढ़ाते रहते थे। बहुत हाजिर जवाब थे। कैसे विकास किया जाए, देश को आगे बढ़ाया जाए, उनकी मुख्य खासियत रही इस पर उन्होंने कार्य कर अपनी क्षमता व अनुभव का परिचय दिया। काफी मुद्दों पर उन्होंने मुख्य भूमिका का निर्वाह किया। उन्होंने किताबे भी लिखी।

सीडीएस चौहान द्वारा व्यक्त किया गया, डीएमए मे लिखे नोट से मुझे लगता है वे गहराई से हर विषय को देखते थे, उसका अवलोकन करते थे। आज अगर जम्मू-कश्मीर में शांति है, वहा का जनमानस स्थानीय स्तर पर बिना विघ्न बाधा के आराम से काम कर रहा है तो इसका सबसे बड़ा श्रेय जनरल बिपिन रावत को जाता है। देश की पहली सर्जिकल स्ट्राइक उन्होंने की थी। बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के साथ उन्होंने जो अपनी सैन्य विद्यता व अनुभव का परिचय दिया, प्रेरणाश्रोत रहा और आज उनकी जगह रह कर उन चीजो को गहराई से देख रहा हूं कि जनरल बिपिन रावत को सैन्य ज्ञान के विषयों की कितनी जानकारी थी।

चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान द्वारा व्यक्त किया गया, जनरल बिपिन रावत का रक्षा क्षेत्र मे आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण मे भी एक बड़ा योगदान रहा। पिछले पांच-छ: साल से थल सेना, वायु सेना और नौ सेना मे स्वदेशी हथियारों को ही तरजीह दी जा रही थी तो इसका एक बड़ा श्रेय जनरल रावत को जाता है। अगर विदेशी हथियार और सैन्य साजो सामान खरीद भी रहे थे तो उसे मेक इन इंडिया के तहत देश मे ही निर्माण करने की कोशिश रहती थी। यही कारण था कि थल सेना स्वदेशी अर्जुन टैंक लेने को तैयार हुई और वायु सेना ने एलसीएच अटैक हेलीकाप्टर लेने को हामी भरी थी। जनरल रावत रक्षा क्षेत्र मे सुधारों के लिए हमेशा जाने जाते रहैंगे। भारत ने एक निष्ठावान को खोया। जो आधुनिक विकास का पथ व अनुभव जनरल बिपिन रावत छोड़ कर गए हैं, भविष्य के काम आयेगा।

केन्द्रीय रक्षा एव पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट द्वारा दिए गए व्याख्यान मे व्यक्त किया गया, जनरल बिपिन रावत से मैंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने मुझे सेनाओ के बारे मे बहुत कुछ जानकारी दी। अजय भट्ट द्वारा व्यक्त किया गया, हमारे यहां धीर-वीर, शौर्यवान और पराकर्मी योद्धाओ की एक लम्बी परंपरा रही है। जब-जब देश मे शौर्य और पराक्रम की बात होती है उनके बिना बात अधूरी रहती है। मैं समझता हूं जनरल बिपिन रावत भी इन्ही महान विभूतियों की श्रेणी मे आते हैं। जनरल बिपिन रावत ने अपना पूरा जीवन सशस्त्र सेनाओ और सम्पूर्ण राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उनकी अकाल मृत्यु के कारण देश ने एक महान देशभक्त, एक बहादुर जनरल और एक दूरदृष्टा मिलट्री रणनीतिकार खो दिया। अपनी सशस्त्र सेनाओ को रूपांतरित करने और और राष्ट्र निर्माण के उनके दूरदर्शी सपनों को पूरा करने मे हमे प्रयास करने चाहिए और उनके द्वारा सेनाओ मे जो भी परिवर्तन वह करना चाहते थे, वह हमको करना चाहिए।

आयोजित आयोजन के मंच पर मुख्य वक्ताओ के अतिरिक्त मंचासीनो मे उप सेना प्रमुख जनरल एमवी सुचिन्द्र कुमार, स्व. बिपिन रावत की पुत्री तारिणी रावत तथा हिलमेल फाउंडेशन चेयरमैन चेतना नेगी मुख्य थे। बडी संख्या मे तीनो सेनाओ के उच्च अधिकारी व कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

मौजूदा और पूर्व सैन्य अधिकारियों मे उपस्थित पूर्व इंजीनियर इन चीफ ले.जनरल हरपाल सिंह, एडमिरल जी अशोक कुमार, भारतीय अंतरिक्ष संघ महानिदेशक ले.जनरल अनिल भट्ट, पूर्व उप नौ सेना प्रमुख वाइस एडमिरल एम एस पंवार इत्यादि इत्यादि के साथ-साथ उद्योग जगत से जुडे रहे मुख्य सलाहकार टी सी उप्रेती, ओएनजीसी एच आर विंग जीएम दुर्गा सिंह भंडारी, दिल्ली विश्व विद्यालय प्रोफैसर हरेन्द्र असवाल, भारतीय कृषि विशेषज्ञ किमोटी, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केन्द्र अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार चंद्र मोहन पपनैं, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सलाहकार पूरन नैलवाल, कृषि व बागवानी क्षेत्र मे अग्रणी गोपाल उप्रेती इत्यादि की उपस्थिति मुख्य रही।

आयोजन मे उपस्थित सभी सैन्य अधिकारियों व उपस्थित प्रबुद्ध जनो द्वारा जनरल बिपिन रावत के चित्र पर भावपूर्ण गुलाब की पंखुडियां अर्पित की गई।

आयोजन के इस अवसर पर वरिष्ठ टीवी पत्रकार मंजीत नेगी द्वारा देश के पहले सीडीएस जनरल रावत के जीवन पर लिखी गई अंग्रेजी पुस्तक ‘जनरल बिपिन रावत : द वार्रियर’ का मंचासीन रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, सीडीएस अनिल चौहान, उप सेना प्रमुख जनरल एमवी सुचिन्द्र कुमार, स्व. बिपिन रावत की पुत्री तारिणी रावत, हिल मेल फाउंडेशन चेयरमैन चेतना नेगी तथा पुस्तक प्रकाशक प्रभात कुमार के कर कमलो किताब का लोकार्पण किया गया। हिल मेल फाउंडेशन चेयरमैन चेतना नेगी द्वारा सभी अतिथियों व गणमान्य जनो का आयोजन मे उपस्थित होने हेतु आभार व्यक्त किया गया, अवगत कराया गया देश के प्रथम सीडीएस जनरल स्व.बिपिन रावत पर उनके फाउंडेशन द्वारा यह दूसरा मैमोरियल व्याख्यान का आयोजन किया गया।

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