Post Views: 0
SIR, मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज, प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
Amar sandesh दिल्ली।दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में आज दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से भारत निर्वाचन आयोग कार्यालय तक लोकतांत्रिक विरोध मार्च आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची में नाम जोड़ने-बढ़ाने/हटाने की प्रक्रिया, चुनावी पारदर्शिता तथा निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
यह विरोध उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आयोजित किया गया जिसमें दावा किया गया है कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी
ने लगभग 10 महीनों में कम-से-कम 14 अवसरों पर आयोग के कुछ निर्णयों एवं प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियाँ दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची, Form-6, वोटर डेटा और डिजिटल प्रणालियों से जुड़े विषयों का उल्लेख है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के संदर्भ में कहा है कि SIR सहित आयोग के सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए। प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मांग की कि निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और उनसे संबंधित रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाए, ताकि सामने आए दावों और आयोग के स्पष्टीकरण का तथ्यात्मक परीक्षण हो सके। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा“लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मतदाता का विश्वास है। चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर यदि किसी भी स्तर पर सवाल उठते हैं तो उनका जवाब पारदर्शिता और सार्वजनिक तथ्यों के माध्यम से दिया जाना चाहिए। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से प्रभावित नागरिकों को सूचना, आपत्ति और अपील का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज से जुड़े गंभीर सवालों का समाधान निष्पक्ष जाँच और सार्वजनिक जवाबदेही के माध्यम से होना चाहिए। कांग्रेस ने इसी उद्देश्य से शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखी है।
दिल्ली प्रदेश ओबीसी कांग्रेस अध्यक्ष श्री राजीव वर्मा ने कहा“मतदाता सूची में किसी नागरिक का नाम जुड़ना, हटना या बहाल होना उसके लोकतांत्रिक अधिकार से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता आवश्यक है और प्रभावित नागरिकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज बताई जा रही आपत्तियों और उनसे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता स्वयं तथ्यों को देख और समझ सके।
दिल्ली प्रदेश ओबीसी कांग्रेस के महासचिव एडवोकेट हरीश गोला ने कहा चुनावी प्रक्रिया में कानून का शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित निर्णयों, मतदाता सूची में किए गए बदलावों तथा डिजिटल चुनावी प्रणालियों के संचालन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी आशंका का समाधान तथ्यों के आधार पर हो सके।”
उन्होंने कहा कि जहाँ ‘वोट चोरी’ अथवा चुनावी अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, वहाँ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर उपलब्ध रिकॉर्ड की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जानी चाहिए। साथ ही, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे/पद से हटाने की मांग कांग्रेस द्वारा उठाई जा रही है और इस मांग पर संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार निर्णय होना चाहिए।
हमारी प्रमुख मांगें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज बताई गई लिखित आपत्तियों और संबंधित रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाए।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से प्रभावित नागरिकों को उचित सूचना तथा प्रभावी आपत्ति एवं अपील का अवसर दिया जाए।
चुनावी डेटा एवं डिजिटल प्रणालियों के संचालन में स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
‘वोट चोरी’ एवं चुनावी अनियमितता से जुड़े आरोपों की रिकॉर्ड-आधारित स्वतंत्र जाँच कराई जाए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, संवैधानिक जवाबदेही और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा आवश्यक है।
“लोकतंत्र में संवाद, संविधान में विश्वास।”
Related