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हिमालयी जल, जंगल और जमीन के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा उठाया जाएगा प्रधानमंत्री के समक्ष

सी एम पपनैं

 

नई दिल्ली। हिमालयी जल, जंगल और जमीन के अस्तित्व से जुड़े संवेदन शील मुद्दे पर व्यापक चिंतन मनन करने हेतु विगत दिनों गढ़वाल भवन में उत्तराखंड के प्रतिष्ठित प्रबुद्ध प्रवासी जनों द्वारा जानेमाने समाज सेवी कमल सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। उक्त आयोजित बैठक में उत्तराखंड के प्रतिष्ठित प्रवासी जनों में प्रमुख मनवर सिंह रावत, अजय सिंह बिष्ट, जय लाल नवानी, मंगल सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह रावत, यशोदा घिल्डियाल, अर्जुन सिंह राणा, अनिल पंत, आजाद सिंह नेगी, चंद्र मोहन पपनैं, दीपक द्विवेदी इत्यादि इत्यादि द्वारा सहभागिता कर उक्त मुद्दे पर सार्थक मंत्रणा की गई।

आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, अगामी 11 अगस्त को उत्तराखंड सदन चाणक्य पुरी में हिमालयी जल, जंगल और जमीन के सरोकारों से जुड़े चिंतकों की एक बैठक का आयोजन किया जाएगा। आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर उक्त संवेदन शील ज्वलंत मुद्दे को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष तथा संसद के दोनों सदनों के साथ-साथ उत्तराखंड राज्य विधान सभा के पटल पर जोर-शोर से उठाए जाने पर बल दिया जायेगा।

 

आयोजित उक्त महत्वपूर्ण बैठक में प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा व्यक्त किया गया, उत्तराखंड के पहाड़ी अंचल में जो कुछ भी घटनाएं घट रही हैं, चाहे वह अनियंत्रित विकास के नाम पर काटे जा रहे लाखों-करोड़ों पेड़ों से जुड़ा हुआ मामला हो या अंचल के जंगलों में लगने वाली भयावह आग से हो या लाखों की संख्या में पहुंचने वाले धार्मिक श्रद्धालुओं या पर्यटकों की भारी भीड़ हो इन सबका सीधा प्रभाव हिमालय पर पड़ता है। हिमालयी जलवायु, पर्यावरण व तापमान पर पड़ता है, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है। तापमान में वृद्धि होती है। ग्लेशियर पिघल कर पीछे खिसकने लगते हैं। बादल फटने से बाढ़ आती है, भयावह भू-स्खलन होता है। बड़े स्तर पर जानमाल का नुकसान होता है, जनमानस प्रभावित व पीड़ित होता है।

वक्ताओं द्वारा कहा गया, यूएनओ ने भी गंगा व हिमालय पर चिंता व्यक्त की है। कहा गया, उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है, उनका अनियंत्रित दोहन प्रदेश व जन के हित में नहीं हो रहा है, उसका लाभ राज्य को नहीं मिल रहा है। ग्रीन बोनस व पानी की रायल्टी से राज्य अछूता है। वक्ताओं द्वारा कहा गया, उक्त मुद्दों को व्याप्त राजनीति से ऊपर उठ कर जनहित में माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष उठाना जरूरी है। सदन के पटल पर रखना जरूरी है। वैश्विक धरोहर हिमालय के साथ-साथ अंचल के जल, जंगल व जमीन को बचाना नितांत जरूरी है।

आयोजकों द्वारा दी गई सूचना के मुताबिक 11 अगस्त, दिन रविवार, नई दिल्ली चाणक्य पुरी स्थित उत्तराखंड सदन में दिन में 11 बजे दिल्ली एनसीआर के साथ-साथ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों व कस्बों से कुछ चुनिंदा प्रबुद्ध जन जिनकी संख्या करीब एक सौ तक आंकी गई है, आयोजित बैठक में शिरकत करने की सूचना है। राज्य के टिहरी विधानसभा विधायक किशोर उपाध्याय के साथ-साथ अक्षरधाम दिल्ली प्रमुख कोठारी मुनि वत्सल स्वामी जी तथा चंद्रोदय मंदिर वृंदावन के विष्णु भक्त स्वामी जी की आयोजित बैठक में मुख्य रूप से शामिल होने की पुष्टि की गई है।

 

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