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स्वदेशी समुद्री शक्ति को नई धार, भारतीय तटरक्षक बल में शामिल हुआ ‘समुद्र प्रताप’

Amar sandesh नई दिल्ली |भारत की समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण क्षमताओं को नई ऊँचाई देते हुए भारतीय तटरक्षक बल के स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘आईसीजीएस समुद्र प्रताप’ को आज औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस पोत का कमीशनिंग समारोह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह (आईएएस), भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि (एवीएसएम, पीटीएम, टीएम) सहित केंद्र व राज्य सरकारों के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

‘समुद्र प्रताप’, जिसका अर्थ है समुद्रों की गरिमा, भारतीय तटरक्षक बल के उस संकल्प का प्रतीक है, जिसके तहत सुरक्षित, संरक्षित और स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करते हुए राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा की जाती है। यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है और आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत स्वदेशी जहाज़ निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह पोत पूरी तरह भारत में ही परिकल्पित, अभिकल्पित और निर्मित किया गया है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। 114.5 मीटर लंबाई और 16.5 मीटर चौड़ाई वाले इस अत्याधुनिक पोत की गति 22 नॉट्स से अधिक है। इसमें उन्नत स्वचालन एवं कम्प्यूटरीकृत नियंत्रण प्रणालियाँ लगी हैं, जो भारत की जटिल जहाज़ निर्माण क्षमताओं को दर्शाती हैं।

लगभग 4,200 टन भार वहन करने वाला यह पोत दो शक्तिशाली 7,500 किलोवाट डीज़ल इंजनों से संचालित है, जो स्वदेशी रूप से विकसित नियंत्रणीय पिच प्रोपेलर और गियर बॉक्स से जुड़े हैं। इससे पोत को बेहतर संचालन क्षमता, संतुलन और 6,000 समुद्री मील की दीर्घ सहनशीलता प्राप्त होती है।

‘समुद्र प्रताप’ का मुख्य दायित्व समुद्र में प्रदूषण नियंत्रण एवं आपदा प्रतिक्रिया है। इसके लिए इसमें साइड-स्वीपिंग आर्म्स, फ्लोटिंग बूम्स, उच्च क्षमता स्किमर, पोर्टेबल बार्ज तथा अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इसके अतिरिक्त, यह पोत बाह्य अग्निशमन प्रणाली (फायर फाइटिंग क्लास-1), गतिशील स्थिति प्रणाली, एकीकृत ब्रिज प्रणाली, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली और स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली से सुसज्जित है, जिससे मिशन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इसकी रक्षा क्षमता के लिए 30 मिमी तोप और दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोट नियंत्रित हथियार भी लगाए गए हैं।

केरल एवं माहे क्षेत्र के लिए कोच्चि स्थित पश्चिमी तटरक्षक क्षेत्र के अंतर्गत तैनात यह पोत समुद्री निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य दायित्वों का निर्वहन करेगा। पोत का नेतृत्व उप महानिरीक्षक अशोक कुमार भामा कर रहे हैं। इसमें 14 अधिकारी एवं 115 कार्मिक तैनात हैं, जिनमें दो महिला अधिकारियों की पहली बार नियुक्ति की गई है, जो पुरुष अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दायित्व निभाएँगी।

‘आईसीजीएस समुद्र प्रताप’ के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पोत भारत के समुद्री क्षेत्रों में दीर्घकालिक निगरानी एवं त्वरित प्रतिक्रिया अभियानों को भी सशक्त बनाएगा।

देश में निर्मित अब तक का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’, भारत की जहाज़ निर्माण उत्कृष्टता और स्वच्छ, सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर समुद्री भविष्य की दीर्घकालिक दृष्टि का सशक्त प्रतीक है।

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