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“अब नहीं रुकेगा भारत का समुद्री व्यापार, संकट में भी सुरक्षा कवच बना नया इंश्योरेंस पूल : –एम. नागराजू”

अमर संदेश, नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक समुद्री व्यापार पर मंडरा रहे जोखिमों के बीच भारत सरकार ने देश के समुद्री व्यापार और जहाजरानी क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने मंगलवार को “भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल” (BMIP) लॉन्च किया, जिसकी कुल क्षमता 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर रखी गई है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर अर्थात लगभग 12,980 करोड़ रुपये की संप्रभु गारंटी भी प्रदान की गई है।

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने की। इस अवसर पर विशेष सचिव संजय लोहिया, अतिरिक्त सचिव देबाशीष प्रस्ती, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हितेश जोशी, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गिरिजा सुब्रमणियन, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की महासचिव कस्तूरी सेनगुप्ता तथा पोत, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने “होगर ऑफशोर एंड मरीन प्राइवेट लिमिटेड” को बीएमआईपी के तहत जारी पहला “मरीन हल एंड मशीनरी वॉर पॉलिसी” दस्तावेज सौंपा। यह पॉलिसी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी की गई है, जो युद्ध संभावित उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में जहाजों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी।

इसके साथ ही “वेदांता स्टरलाइट कॉपर लिमिटेड” को केबल वायर आयात के लिए “मरीन कार्गो वॉर पॉलिसी” प्रदान की गई। वहीं “बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड” को भी बीमा सुरक्षा कवर जारी किया गया।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि कई बार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी बीमा और पुनर्बीमा कंपनियां जहाजों तथा कार्गो को बीमा सुरक्षा देने से पीछे हट जाती हैं। ऐसी स्थिति में भारत के समुद्री व्यापार और आयात-निर्यात गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने यह घरेलू बीमा पूल तैयार किया है।

यह पूल जहाजों के “हल एंड मशीनरी”, “कार्गो”, “पी एंड आई” तथा “वॉर रिस्क” जैसे सभी प्रमुख समुद्री जोखिमों को कवर करेगा। भारतीय ध्वज वाले जहाजों, भारत नियंत्रित जहाजों तथा भारत आने-जाने वाले जहाजों को इसका लाभ मिलेगा।

सरकार ने पूल के संचालन के लिए एक गवर्निंग बॉडी और अंडरराइटिंग कमेटी का भी गठन किया है। GIC Re को इसका प्रशासक बनाया गया है। घरेलू बीमा कंपनियां पूल की सदस्य होंगी और सामूहिक क्षमता के आधार पर बीमा पॉलिसियां जारी करेंगी।

जानकारी के अनुसार 100 मिलियन डॉलर तक के दावों का निपटान पूल अपनी क्षमता से करेगा, जबकि इससे अधिक दावों की स्थिति में केंद्र सरकार की संप्रभु गारंटी का सहारा लिया जाएगा।

“भारत के समुद्री व्यापार को आत्मनिर्भर सुरक्षा मिलेगी”  एम. नागराजू

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल देश के समुद्री व्यापार को मजबूत सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव या प्रतिबंधों के बावजूद भारत की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इससे भारत की वित्तीय संप्रभुता मजबूत होगी और वैश्विक व्यापार में देश की स्थिति और अधिक सशक्त बनेगी।

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