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ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित, लोगों को पैनिक ना होने की सलाह दी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने
अमर चंद्र
नई दिल्ली। एशिया में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए आवश्यक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बुधवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया को सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि देश में ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी संबंधित मंत्रालयों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है और सरकार किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। देश की दैनिक खपत लगभग 55 लाख बैरल है और वर्तमान में उपलब्ध आपूर्ति इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य रूप से आने वाली मात्रा से भी अधिक है। अब भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिसके कारण कच्चे तेल के आयात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के मार्गों से आ रहा है, जबकि पहले यह लगभग 55 प्रतिशत था। अधिकारियों के अनुसार कच्चे तेल की दो अतिरिक्त खेपें पहले ही रास्ते में हैं और आने वाले दिनों में भारत पहुंच जाएंगी, जिससे आपूर्ति की स्थिति और मजबूत होगी। देश भर के तेल शोधन संयंत्र भी उच्च क्षमता पर कार्य कर रहे हैं और कुछ स्थानों पर क्षमता उपयोग 100 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गया है।
प्राकृतिक गैस के संबंध में बताया गया कि भारत की कुल गैस खपत लगभग 189 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिसमें से लगभग 97.5 मिलियन क्यूबिक मीटर का उत्पादन देश में ही होता है। मौजूदा परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन क्यूबिक मीटर की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसकी भरपाई के लिए वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और मार्गों से गैस की खरीद की जा रही है। गैस कंपनियों ने नए स्रोतों से एलएनजी कार्गो भी सुनिश्चित किए हैं और दो कार्गो देश की ओर रवाना हो चुके हैं। सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी कर गैस आपूर्ति के प्रबंधन की व्यवस्था की है। इसके तहत घरेलू पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति में कोई कटौती नहीं की जाएगी, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों को पिछली छह महीने की औसत आपूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। उर्वरक संयंत्रों को लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी और रिफाइनरी तथा पेट्रोकेमिकल इकाइयों में लगभग 35 प्रतिशत की कटौती की जाएगी ताकि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखा जा सके।
रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इन आयातों का लगभग 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आता है, जो वर्तमान घटनाक्रमों के कारण प्रभावित हुआ है। स्थिति को देखते हुए 8 मार्च 2026 को सरकार ने तेल शोधन संयंत्रों और पेट्रोकेमिकल परिसरों को निर्देश दिया कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन और अन्य गैसों को एलपीजी पूल में भेजकर घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं। इन उपायों के परिणामस्वरूप घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इस उत्पादन को घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों के लिए प्राथमिकता दी जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर घबराहट के कारण उपभोक्ताओं द्वारा अनावश्यक रूप से सिलेंडर बुक कराने और जमाखोरी करने की प्रवृत्ति सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि एलपीजी की सामान्य डिलीवरी अवधि लगभग ढाई दिन है और उपभोक्ताओं को घबराकर अतिरिक्त बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं है। मांग प्रबंधन के लिए एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित, घबराकर गैस सिलेंडर बुक न करें।
संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस मौके पर कहा कि वितरकों के स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली को लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं तक विस्तारित किया जा रहा है। आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई है, जो रेस्तरां, होटल और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को किए जा रहे एलपीजी आवंटन की समीक्षा करेगी और उपलब्ध आपूर्ति के निष्पक्ष वितरण को सुनिश्चित करेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस एजेंसियों द्वारा किसी भी प्रकार की मनमानी या जमाखोरी की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
समुद्री सुरक्षा के संबंध में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज कार्यरत हैं, जिनमें कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं। इन जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। 28 फरवरी से जहाजरानी महानिदेशालय में 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो क्षेत्र की स्थिति की निगरानी कर रहा है और आवश्यक समन्वय कर रहा है। देश के सभी प्रमुख बंदरगाह सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और निर्यात-आयात गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय दूतावास लगातार अपने नागरिकों के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सहायता प्रदान कर रहे हैं। ईरान में लगभग नौ हजार भारतीय नागरिक मौजूद हैं और वहां के भारतीय छात्रों तथा तीर्थयात्रियों को तेहरान से बाहर सुरक्षित शहरों में स्थानांतरित किया गया है। कुछ फंसे हुए भारतीयों को मस्कट, रियाद और जेद्दा से उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से स्वदेश लौटने में भी सहायता दी गई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक कर आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने और आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। राज्यों को यह भी सलाह दी गई है कि वे जनता को समय-समय पर प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्तर पर प्रवक्ताओं को नामित करें और सरकारी माध्यमों से सही सूचना का प्रसार करें।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश में ऊर्जा सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर ईंधन या रसोई गैस की अनावश्यक बुकिंग न करें।
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