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शहीद श्रीदेव सुमन बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन, गढ़वाल भवन में गूंजा ‘श्रीदेव सुमन अमर रहें’ का स्वर

“उत्तरकाशी जन विकास परिषद” की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक हस्तियों की सहभागिता

Amar chandनई दिल्ली।उत्तराखंड राज्य आंदोलन की प्रेरणा, युवाओं के संघर्ष का प्रतीक और टिहरी रियासत के विरुद्ध आज़ादी की मशाल बने शहीद श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर आज गढ़वाल भवन, पंचकुइयां रोड, नई दिल्ली में एक भावनात्मक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन “उत्तरकाशी जन विकास परिषद” द्वारा किया गया जिसकी अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष एस.एन. बसलियाल ने की।

कार्यक्रम में शामिल विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्रीदेव सुमन जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। शहीद श्रीदेव सुमन के बलिदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन, त्याग और संघर्ष आज के युवा वर्ग को लोकतंत्र, अधिकार और न्याय के लिए प्रेरित करता रहेगा।

इस अवसर पर गढ़वाल भवन के वर्तमान अध्यक्ष सुरत सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं समाजसेवी हरिपाल रावत, मदन मोहन सती, वरिष्ठ पत्रकार कुशाल जीना, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार पंत, दाताराम चमोली, महादेव प्रसाद बालोनी, श्री डबराल,उदय ममगाई,  श्रीमती यशोदा घिल्डियाल, श्रीमती कुसुम बिष्ट, श्रीमती संतोष शर्मा बडोनी, श्रीमती मीना कंडवाल, राखी बिष्ट, श्रीमती मनोरमा भट्ट, मनीष भट्ट, श्रीमती निर्मला नेगी, श्रीमती सुनीता खर्कवाल, कई गणमान्य नागरिक और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में शहीद श्रीदेव सुमन के विचारों और संघर्ष को आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बताया।

इस श्रद्धांजलि सभा में शहीद श्रीदेव सुमन जी को उपस्थित सभी लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों से आए समाजसेवी, छात्र, प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों के प्रतिनिधि और युवा भी शामिल हुए।

सुमन जी का बलिदान – प्रेरणा का शाश्वत स्रोत:

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रीदेव सुमन ने टिहरी रियासत की तानाशाही के विरुद्ध जो अनशन और संघर्ष किया, वह आधुनिक भारत के स्वराज की नींव है। 25 साल की अल्पायु में जो बलिदान उन्होंने दिया, वह अमर हो गया। उनकी शहादत उत्तराखंड राज्य निर्माण की वैचारिक चेतना का मूल स्तंभ है।

श्रीदेव सुमन के विचार आज भी जनहित, जनआंदोलनों और सामाजिक न्याय के मूल मंत्र के रूप में प्रासंगिक हैं। वक्ताओं ने यह भी प्रस्ताव रखा कि केंद्र व राज्य सरकार को शहीद श्रीदेव सुमन के नाम पर दिल्ली में एक स्मारक या संस्थान की स्थापना करनी चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान की जानकारी मिल सके।

इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि “श्रीदेव सुमन न केवल एक शहीद हैं, बल्कि एक विचार हैं जो हर संघर्षरत जन में जीवित हैं।”

उनकी स्मृति में आयोजित यह संगोष्ठी आने वाले समय में उत्तराखंड की नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला एक सशक्त मंच बनेगी।

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