Tuesday, November 3, 2026
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थिएटर और सिनेमा जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहीं बबली अधिकारी, उत्तराखंड की कला एवं संस्कृति को दे रहीं नई पहचान

रंगमंच से सिनेमा तक बबली अधिकारी की शानदार यात्रा, उत्तराखंड का नाम कर रहीं रोशन

 

 

Amar sandesh नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड की प्रतिभाएं आज देश-विदेश में अपनी मेहनत, हुनर और प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बना रही हैं। कला, संस्कृति, रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में भी उत्तराखंड की बेटियां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। ऐसी ही एक प्रतिभाशाली कलाकार हैं बबली अधिकारी, जो अपने अभिनय और रंगमंच के प्रति समर्पण से लगातार आगे बढ़ रही हैं।

मूल रूप से उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के अलेरू गांव की रहने वाली बबली अधिकारी वर्तमान में दिल्ली प्रवासी हैं। हालांकि, दिल्ली में रहने के बावजूद अपनी जन्मभूमि, पहाड़ी संस्कृति, परंपराओं और मातृभाषा से उनका गहरा जुड़ाव बना हुआ है। उन्हें अपनी क्षेत्रीय बोली और भाषा पर भी अच्छी पकड़ है। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और अपनी जड़ों के प्रति उनका लगाव उनके व्यक्तित्व में साफ दिखाई देता है।

बबली अधिकारी ने वर्ष 2023 से थिएटर और फिल्मों के क्षेत्र में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की। कम समय में ही उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से उल्लेखनीय पहचान बनाई है। अब तक वह चार फिल्मों में काम कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिवेणी ब्रूम के विज्ञापन में भी अभिनय किया है।

उनकी कला प्रतिभा को एक और महत्वपूर्ण अवसर तब मिला, जब हिंदी अकादमी की ओर से उनका चयन असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) में भी नाटकों में अभिनय किया है, जो उनके रंगमंचीय अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बबली अधिकारी को राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित गणतंत्र दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में उन्होंने वर्ष 2025 और 2026 में झांकी कलाकार (Tableau Artist) के रूप में सहभागिता की। राष्ट्रीय मंच पर लगातार दो वर्षों तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना उनके लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

अभिनय के साथ-साथ बबली अधिकारी अपने हंसमुख, मिलनसार और सामाजिक स्वभाव के लिए भी जानी जाती हैं। वह सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। उनके लिए अभिनय केवल एक पेशा नहीं, बल्कि अपनी कला, संस्कृति और समाज से जुड़ने का एक माध्यम भी है।

बबली अधिकारी का सपना थिएटर और फिल्म जगत में निरंतर आगे बढ़ना और अपनी प्रतिभा के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति एवं पहचान को व्यापक मंच तक पहुंचाना है। दिल्ली में रहते हुए भी अपनी पहाड़ी बोली, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखना उनकी अपनी मिट्टी के प्रति आत्मीयता को दर्शाता है।

बबली अधिकारी जैसी प्रतिभाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पहाड़ की बेटियां अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं। टिहरी गढ़वाल के अलेरू गांव से शुरू हुआ उनका यह सफर आज थिएटर, फिल्मों और राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों तक पहुंच रहा है। उनका निरंतर प्रयास उत्तराखंड की युवा पीढ़ी के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायक है।

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