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“एक शिक्षक का संकल्प, 30 पेड़ों की सौगात; ‘संकल्प वाटिका’ से पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बने गिरीश घिल्डियाल”
Amar sandesh नई दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े अभियान चलाने के साथ-साथ यदि एक व्यक्ति अपने स्तर पर भी ईमानदार प्रयास करे तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली की मजबूत नींव रख सकता है। उत्तराखंड के देहरादून निवासी एवं राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज बड़ासी, रायपुर में अंग्रेजी प्रवक्ता गिरीश घिल्डियाल इसी सोच को अपने कार्यों के माध्यम से साकार कर रहे हैं। उनके पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण को देखते हुए देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘पर्यावरण गौरव सम्मान-2026’ समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय हरेला महोत्सव के अवसर पर 30 अगस्त 2026 को
कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में अमर संदेश समाचार पत्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण विषय पर विचार गोष्ठी एवं ‘पर्यावरण गौरव सम्मान-2026’ समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री तीरथ सिंह रावत रहे। उनके कर-कमलों से गिरीश घिल्डियाल को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद बचेती, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती लता गुप्ता, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट के निदेशक डॉ. संजीत कुमार, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी संजय दरमोडा शर्मा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्य आंदोलनकारी हरिपाल रावत तथा मैक्स अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. दीपक अरोड़ा सहित अनेक विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कवि हेमंत ने प्रभावशाली अंदाज में किया।
2021 में शुरू किया ‘संकल्प वाटिका’ अभियान
गिरीश घिल्डियाल वर्तमान में राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज बड़ासी, रायपुर, देहरादून में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं और मई 2018 से विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अध्यापन कार्य के साथ उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया।
वर्ष 2021 में उन्होंने अपने कॉलेज के नजदीक ग्राम समाज की भूमि पर ‘संकल्प वाटिका’ तैयार की। इस वाटिका में आम, अमरूद, नींबू, आंवला, सेब सहित विभिन्न फलदार प्रजातियों के करीब 25 से 30 पेड़ लगाए गए। जिस पौधे को उन्होंने वर्षों पहले एक संकल्प के साथ रोपा था, वह अब पेड़ बनकर फल देने लगा है। अमरूद के पेड़ों पर फल आना उनके इस प्रयास की सफलता का जीवंत प्रमाण है।
उनका पर्यावरण संरक्षण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। विद्यालय में विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ वह अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में भी लोगों को पौधरोपण एवं प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
वन विभाग भी कर चुका है सम्मानित
पर्यावरण के प्रति उनकी सक्रियता को पहले भी पहचान मिल चुकी है। उत्तराखंड वन विभाग ने हरेला पर्व-2024 के अवसर पर पर्यावरण सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति सक्रिय भागीदारी और उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिन या किसी एक पर्व तक सीमित नहीं होना चाहिए। हरेला जैसे पर्व हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्व की याद दिलाते हैं, लेकिन इस संकल्प को पूरे वर्ष अपने व्यवहार और कार्यों में उतारना जरूरी है।
‘दिल्ली में मिला सम्मान मेरे लिए गौरव का विषय’
सम्मान प्राप्त करने के बाद गिरीश घिल्डियाल ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय हरेला पर्व के अवसर पर मिला यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने अमर संदेश समाचार पत्र की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजधानी दिल्ली से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि मीडिया समाज में सकारात्मक कार्य करने वाले लोगों को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। अमर संदेश द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सम्मानित करने से निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी प्रकृति संरक्षण के लिए आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।
अमर संदेश के संपादक अमर चंद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर एक पौधा लगाने, उसकी देखभाल करने और दूसरों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संकल्प ले, तो देश को हरित और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। गिरीश घिल्डियाल जैसे शिक्षक इसी बदलाव के प्रेरणास्रोत हैं।
‘संकल्प वाटिका’ आज केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि एक शिक्षक के संकल्प, प्रकृति के प्रति प्रेम और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य की सोच का प्रतीक बन चुकी है।
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