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तेल बाजार की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और समय पर निवेश को लेकर हुई अहम चर्चा
Amar sandesh नई दिल्ली। भारत और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने तथा वैश्विक तेल बाजार को स्थिर, संतुलित और भरोसेमंद बनाए रखने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ओपेक के महासचिव हैथम अल घैस ने की।
बैठक में तेल बाजार की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा तथा तेल उद्योग में पर्याप्त और समय पर निवेश की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक ऊर्जा बाजार की संभावनाओं की समीक्षा की। इस दौरान वैश्विक आर्थिक विकास और ऊर्जा मांग में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत और ओपेक के बीच संबंध स्वाभाविक रूप से पूरक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने ओपेक महासचिव के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत ओपेक और उसके सदस्य देशों के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे संवाद को विशेष महत्व देता है। इस सहयोग ने ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में योगदान दिया है।
पुरी ने कहा कि दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग का एक महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्पादक देशों और उपभोक्ता देशों के बीच निरंतर संवाद निवेश को बढ़ावा देने, ऊर्जा क्षेत्र को अधिक सक्षम और लचीला बनाने तथा वैश्विक विकास के लिए भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए ओपेक के प्रयासों की सराहना की। साथ ही भारत और ओपेक से मिलकर संतुलित, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य वैश्विक ऊर्जा बाजार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
वहीं, ओपेक महासचिव हैथम अल घैस ने कहा कि भारत के साथ ऊर्जा संवाद ओपेक की प्राथमिकताओं में शामिल है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद को शुरू हुए 11 वर्ष हो चुके हैं, जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 में नई दिल्ली में हुई थी।
अल घैस ने ऊर्जा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के संतुलित, व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की कई ऊर्जा प्राथमिकताएं ओपेक की प्राथमिकताओं से भी मेल खाती हैं।
ओपेक महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संवाद के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए कूटनीति और संवाद महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
बैठक में भारत और ओपेक के बीच ऊर्जा संवाद के तहत अब तक हुई प्रगति, विशेषकर तकनीकी स्तर पर हुए सहयोग की भी सराहना की गई। दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में और गहरे सहयोग की आवश्यकता पर सहमति जताई।
बैठक के अंत में ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद की 8वीं उच्चस्तरीय बैठक को आपसी सहमति से तय तिथि पर वियना, ऑस्ट्रिया में आयोजित करने पर सहमति बनी।
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