दिल्लीस्वास्थ्य

यमुना की स्वच्छता के लिए एकजुट हुआ समाज, 70 लोगों ने निकाला एक टन से अधिक कचरा

गीता कॉलोनी ठोकर नंबर-14 पर सामूहिक स्वच्छता अभियान, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने लिया हिस्सा

Amar Sandesh नई दिल्ली। भारत सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम के मार्गदर्शन में फ्रेंड्स ऑफ यमुना फाउंडेशन के सचिव एवं यमुना सेवक परविंदर मिश्रा के नेतृत्व में गीता कॉलोनी स्थित ठोकर नंबर-14 पर सामूहिक स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान में सहयोगी संस्थाओं ब्रायन प्लस अकादमी, विक्टोरियस फाउंडेशन और पूर्वी दिल्ली आपदा प्रहरी के कार्यकर्ताओं सहित करीब 70 लोगों ने भाग लिया।

स्वच्छता अभियान के दौरान यमुना के आसपास और नदी क्षेत्र में पड़े कचरे को सामूहिक प्रयास से हटाया गया। आयोजकों के अनुसार अभियान में लगभग एक टन कचरा और 17 बोरी कूड़ा एकत्र कर हटाया गया। अभियान में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।

कार्यक्रम में यमुना बाबा अशोक उपाध्याय ने कहा कि यमुना की स्वच्छता केवल सफाई अभियान चलाने से संभव नहीं है। इसके लिए लोगों को अपने आचरण और व्यवहार में बदलाव लाना होगा। यदि लोग नदी में कूड़ा डालना बंद नहीं करेंगे तो यमुना को स्थायी रूप से स्वच्छ बनाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि यमुना को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी केवल सरकार या किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है।

यमुना सेवक परविंदर मिश्रा ने कहा कि नदियां भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नदियों का अस्तित्व मानव जीवन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों से सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा, “नदियां सदैव से हमारे लिए पूजनीय रही हैं। इसलिए इन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।”

ब्रायन प्लस अकादमी के प्रबंधक राजा ने कहा कि नदियां हमारे लिए मां के समान हैं और उन्हें स्वच्छ रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि नदी प्रदूषित और रोगग्रस्त होगी तो उसके किनारे रहने वाले समाज और आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ रहने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के अभियानों से जोड़ने पर जोर दिया।

विक्टोरियस फाउंडेशन के अध्यक्ष राघव चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में विशेष रूप से युवाओं में नदियों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। यह सकारात्मक बदलाव है। यदि युवा वर्ग इसी तरह पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में सक्रिय भागीदारी करता रहा तो नदियों की स्थिति में निश्चित रूप से सुधार लाया जा सकता है।

समाजसेवी नीरज अरोड़ा ने कहा कि अभियान में बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की जिस तरह से भागीदारी दिखाई दी, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अन्य सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से भी यमुना स्वच्छता अभियान से जुड़ने तथा लोगों को नदी में कूड़ा न डालने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया।

केवल सफाई नहीं, व्यवहार परिवर्तन भी जरूरी

यमुना जैसे शहरी नदी तंत्र की स्वच्छता के लिए नियमित सफाई के साथ-साथ कचरे को नदी में जाने से रोकना, प्लास्टिक और अन्य ठोस अपशिष्ट का उचित निस्तारण, सीवेज प्रबंधन तथा नागरिकों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी की सफाई तभी स्थायी परिणाम दे सकती है जब प्रदूषण के स्रोतों पर भी लगातार काम किया जाए।

गीता कॉलोनी में आयोजित यह अभियान इसी दिशा में सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण रहा। अभियान से जुड़े लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नदी को प्रदूषित नहीं करेंगे और अपने आसपास के लोगों को भी यमुना की स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगे।

अभियान में सीमा शर्मा, मंजू नेगी, प्रीति सिंह, अवनीश मिश्रा, जयंत मिश्रा, अविनाश सिंह, आकाश राणा, विमला, कंचन, गुड़िया, शुभम, कल्पना, प्रज्ञा, साक्षी, योगिता, विशाखा, देवराज, हिमांशु, अंशुल, पंकज, सोनी, करुणा मौर्या, धर्मेंद्र, पवन, सतीश, प्रदीप ठाकुर सहित अनेक लोगों ने विशेष सहयोग दिया।

आयोजकों ने कहा कि यमुना की स्वच्छता को केवल एक दिन के अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे निरंतर जनभागीदारी और जागरूकता का अभियान बनाया जाना आवश्यक है।

Share This Post:-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *