उत्तराखण्डदिल्लीहमारी संस्कृति

देवभूमि की माटी से निकली सशक्त आवाज हैं वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक व कवि हेम पन्त

रंगमंच, साहित्य और लेखनी के माध्यम से बढ़ा रहे उत्तराखंड का गौरव

 

अमर चंद्र

नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड की मिट्टी ने देश को अनेक ऐसी प्रतिभाएं दी हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा, कर्मठता और रचनात्मकता के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर में भी उत्तराखंड की ऐसी अनेक शख्सियतें सक्रिय हैं, जो अपने कार्यों और प्रतिभा के माध्यम से न केवल अपना नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि अपनी मातृभूमि उत्तराखंड का गौरव भी बढ़ा रही हैं।

इन्हीं विशिष्ट व्यक्तित्वों में वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक व कवि हेम पन्त का नाम उल्लेखनीय है। सहज, सरल एवं मृदुभाषी स्वभाव के धनी हेम पन्त ने रंगमंच, साहित्य और लेखन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कला और साहित्य के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े रचनात्मक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है।

हेम पन्त का व्यक्तित्व बहुआयामी है। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण हो या साहित्य एवं कविता के प्रति उनकी संवेदनशीलता, उनके कार्यों में समाज और संस्कृति के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती है। रंगकर्म के माध्यम से उन्होंने विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया है।

उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पहाड़ की संवेदनाओं और अपनी जड़ों से जुड़े विषयों के प्रति उनका विशेष लगाव रहा है। यही कारण है कि उनकी रचनात्मक यात्रा में उत्तराखंड की मिट्टी, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की झलक दिखाई देती है।

हेम पन्त जैसे रचनाकारों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वे एनसीआर नोएडा में रहते हुए भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हुए हैं। उनकी लेखनी और रंगकर्म के माध्यम से पहाड़ की संवेदनाओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक समाज तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर दिखाई देता है।

आगामी 20 सितंबर को उत्तराखंड सदन में वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक व कवि हेम पन्त के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन उनके रचनात्मक योगदान को समझने और उनके जीवन-सफर से नई पीढ़ी को परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

यह विचार गोष्ठी केवल किसी एक व्यक्ति के सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी रचनात्मक प्रतिभाओं को पहचान और सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी कला, साहित्य और कर्म के माध्यम से उत्तराखंड की पहचान को आगे बढ़ा रहे हैं।

हेम पन्त की सरलता, सहजता और मृदुभाषी व्यक्तित्व के साथ उनकी साहित्यिक एवं रंगमंचीय सक्रियता उन्हें एक अलग पहचान देती है। उनके लिए कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम भी है।

देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में रंगमंच और साहित्य का अपना महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ऐसे में हेमंत पंत जैसे रचनाकार उस परंपरा को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी रचनात्मक यात्रा यह संदेश देती है कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहकर भी राष्ट्रीय राजधानी जैसे महानगर में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

20 सितंबर को उत्तराखंड सदन में होने वाली विचार गोष्ठी निश्चित रूप से हेम पन्त के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सार्थक चर्चा का मंच बनेगी और उनके रचनात्मक योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ उत्तराखंड की कला एवं साहित्यिक परंपरा को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करेगी।

हेम पन्त की रचनात्मक यात्रा उत्तराखंड की उस जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसमें पहाड़ की मिट्टी, लोक संस्कृति, साहित्य, रंगमंच और सामाजिक सरोकार एक साथ दिखाई देते हैं।

Share This Post:-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *