4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लिए ‘क्यूडेंगा®’ को मंजूरी, हर वर्ष लाखों संक्रमण और हजारों मौतों की चुनौती से निपटने में मिलेगी मदद
Amar sandesh नई दिल्ली। डेंगू की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भारत के पहले डेंगू टीके क्यूडेंगा® (Qdenga®) के विपणन को मंजूरी दे दी है। यह टीका जर्मनी की टाकेदा जीएमबीएच द्वारा विकसित किया गया है और भारत में इसका आयात टाकेदा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड करेगी।
यह मंजूरी टीके की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद दी गई है। क्यूडेंगा® एक टेट्रावैलेंट (चारों डेंगू वायरस प्रकारों से सुरक्षा देने वाला) जीवित, कमजोर (लाइव एटेन्यूएटेड) टीका है। इसे 4 से 60 वर्ष आयु के लोगों को तीन महीने के अंतराल पर दो खुराकों में लगाया जाएगा।
डेंगू भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में तेजी से फैलने वाली मच्छरजनित बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विश्व स्तर पर हर वर्ष लगभग 10 से 40 करोड़ (100–400 मिलियन) डेंगू संक्रमण होने का अनुमान है, जबकि लगभग 20,000 लोगों की मौत डेंगू के कारण होती है। भारत में भी हर वर्ष लाखों लोग डेंगू से प्रभावित होते हैं और सैकड़ों मौतें दर्ज की जाती हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से अधिक हो सकती है।
क्यूडेंगा® के सुरक्षा और प्रभाव का परीक्षण भारत सहित ब्राज़ील, थाईलैंड, श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में किया गया। भारत में भी 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों पर चरण-III (फेज-III) अध्ययन किया गया, जिसमें टीके की सुरक्षा और प्रतिरक्षा क्षमता संतोषजनक पाई गई।
यह टीका पहले ही यूरोपीय संघ, ग्रेट ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड सहित 42 देशों में स्वीकृत हो चुका है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का प्रीक्वालिफिकेशन भी प्राप्त है। दुनिया भर में इसकी 2.4 करोड़ (24 मिलियन) से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं और अब तक प्राप्त पोस्ट-मार्केटिंग आंकड़ों में कोई गंभीर सुरक्षा संबंधी चिंता सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टीका डेंगू के खिलाफ भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति को नई मजबूती देगा। हालांकि, टीकाकरण के साथ-साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना, घरों के आसपास पानी जमा न होने देना, पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना जैसे बचाव उपाय पहले की तरह ही आवश्यक रहेंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह मंजूरी देश में डेंगू नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और बचाव के उपायों को गंभीरता से अपनाएं।