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तीन स्वर्ण पदकों से सम्मानित विदुषी, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार, 23 से अधिक पुस्तकों की रचयिता और भारतीय ज्ञान परंपरा की सशक्त प्रवक्ता
अमर चंद्र
भारतीय शिक्षा, साहित्य और उच्च शिक्षा प्रशासन के क्षेत्र में प्रो. नंदिनी साहू एक ऐसा प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्होंने अपनी विद्वता, सृजनशीलता और दूरदर्शी नेतृत्व से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान स्थापित की है। शिक्षाविद्, कवयित्री, आलोचक, लोकसाहित्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और प्रशासक के रूप में उनका बहुआयामी व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वर्तमान में वे पश्चिम बंगाल हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। इससे पूर्व वे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली में अंग्रेज़ी की प्रोफेसर तथा स्कूल ऑफ फॉरेन लैंग्वेजेज़ की निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी उत्कृष्ट सेवाएँ दे चुकी हैं।
प्रो. नंदिनी साहू का शैक्षणिक जीवन शुरू से ही उत्कृष्ट उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने बरहामपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक एवं स्नातकोत्तर दोनों परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किए। इसके साथ ही उन्हें डोरोथी डीरिंग्स पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में अंग्रेज़ी अध्ययन के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इस प्रकार वे तीन स्वर्ण पदकों से सम्मानित उन चुनिंदा शिक्षाविदों में शामिल हैं, जिन्होंने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता का नया मानदंड स्थापित किया।
समकालीन भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य में प्रो. साहू का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे अमेज़न की बेस्ट सेलिंग लेखिकाओं में शामिल हैं तथा अब तक उनकी 23 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कविता, आलोचना, शोध, भारतीय ज्ञान परंपरा, हिंदू स्टडीज़, लोक साहित्य, संस्कृति अध्ययन, बाल साहित्य, तुलनात्मक साहित्य और रचनात्मक लेखन जैसे अनेक विषयों पर उनका लेखन समान रूप से चर्चित रहा है। उनकी चर्चित पुस्तकों में Sita, Medusa, Collected Poems of Nandini Sahu, Hindu Studies: Foundations and Frameworks, Folklore and the Alternative Modernities, Shedding the Metaphors तथा Re-Reading Jayanta Mahapatra विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी कई पुस्तकें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई हैं।

प्रो. नंदिनी साहू का साहित्य केवल भारत तक सीमित नहीं है। उनकी कविताएँ, शोधपत्र, कहानियाँ और लेख अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड, बेल्जियम, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा अन्य देशों की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हुए हैं। उनकी अनेक रचनाओं का हिंदी, बांग्ला, तेलुगु तथा अन्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनके साहित्य पर देश-विदेश के शोधार्थियों द्वारा लगातार अध्ययन और शोध कार्य किए जा रहे हैं, जो उनकी साहित्यिक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें माइकल मधुसूदन अकादमी अवॉर्ड, लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, टैगोर सम्मान, इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एथिक्स की ऑनरेरी फेलोशिप तथा वर्ष 2026 का Ambassador of Eternity Award प्रमुख हैं। ये सम्मान उनके बहुआयामी योगदान और वैश्विक पहचान को रेखांकित करते हैं।
प्रो. साहू का योगदान केवल लेखन तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems), हिंदू अध्ययन, लोक संस्कृति, तुलनात्मक साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन, दूरस्थ शिक्षा, बाल साहित्य तथा अंग्रेज़ी अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए हैं। वे अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं की संस्थापक संपादक, मुख्य संरक्षक तथा संपादकीय बोर्ड की सदस्य रही हैं। देश-विदेश के विश्वविद्यालयों, साहित्यिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में उन्होंने 100 से अधिक व्याख्यान, मुख्य वक्तव्य और शोध प्रस्तुतियाँ दी हैं।
प्रो. नंदिनी साहू का मानना है कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। वे ऐसी शिक्षा व्यवस्था की पक्षधर हैं जो भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, रचनात्मकता और वैश्विक दृष्टिकोण का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करे। उनके नेतृत्व में शिक्षा और शोध को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
लगभग चार सौ से अधिक कविताओं, सैकड़ों शोधपत्रों, अनेक अंतरराष्ट्रीय व्याख्यानों और दो दशकों से अधिक के समृद्ध शैक्षणिक अनुभव के साथ प्रो. नंदिनी साहू आज भारतीय शिक्षा और साहित्य जगत की अग्रणी हस्तियों में शुमार हैं। उनका व्यक्तित्व इस बात का जीवंत उदाहरण है कि विद्वता, सृजनशीलता, सांस्कृतिक चेतना और दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से शिक्षा को समाज परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है। निस्संदेह, उनका जीवन और कृतित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा, समर्पण और उत्कृष्टता का अनुपम संदेश देता है।
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