अंतरराष्ट्रीय ‘भारत रंग महोत्सव’ मे पर्वतीय कला केन्द्र दिल्ली के गीतनाट्य ‘इंद्रसभा’ का चयन

सी एम पपनैं

नई दिल्ली, 6 जनवरी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के तत्वाधान मे माह फरवरी 2022 मे, आयोजित हो रहे, 22वे अंतरराष्ट्रीय ‘भारत रंग महोत्सव’ (भारंगम) मे उत्तराखंड की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर ख्याति प्राप्त, सांस्कृतिक संस्था ‘पर्वतीय कला केन्द्र दिल्ली’ द्वारा मंचित ‘इंद्रसभा’ गीतनाट्य का चयन, देशभर के 48 रंगमंच विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया है। जिसका मंचन 18 फरवरी 2022 को दिल्ली के सु-विख्यात कमानी सभागार में, युवा रंगमंच निर्देशक अमित सक्सेना के निर्देशन मे मंचित किया जाना है।

पर्वतीय कला केन्द्र द्वारा मंचित उक्त गीतनाट्य का संगीत निर्देशन स्व.मोहन उप्रेती द्वारा किया गया था। महोत्सव मे मंचित हो रहे, ‘इंद्रसभा’ के संगीत को असिस्ट कर रहे हैं, बबीता पांडे, मधु बेरिया साह व हिमांशू जोशी। नृत्य संरचना दिक्षा व दिव्या उप्रेती द्वारा की जा रही है। गीतनाट्य के अन्य मुख्य किरदारों, गायको, नृतको व अन्य सहयोगियों मे महेन्द्र सिंह लटवाल, गोपाल पांडे, खिलानंद भट्ट, भुवन रावत, मुकेश सनवाल, राजेश सिंह, हरि खोलिया, जितेन्द्र चौटाला, गोबिंद महतो, चंद्रा बिष्ट, नीलम राना, पुष्पा जोशी, गीता गुसाई नेगी, धनलक्ष्मी महतो, मनीष शर्मा, आशीष मिश्रा, अनिल मिश्रा, सईद खान व सुरेश कुमार इत्यादि मुख्य हैं।

1999 से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा, एशिया का सबसे बडा, प्रतिष्ठित रंगमंच उत्सव, 22वां ‘भारत रंग महोत्सव’ (भारंगम), जिसे नाटकों का महाकुंभ भी कहा जाता है, इस वर्ष 1 से 21 फरवरी तक नई दिल्ली के साथ-साथ, देश के प्रमुख छह शहरो, नासिक, इंदौर, अगरतला, राउरकेला, बडोदरा तथा हैदराबाद मे आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। कोरोना विषाणु संक्रमण की दहशत के बीच, प्रतिष्ठित इस आयोजन की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है। उम्मीद जाहिर की जा रही है, उक्त महोत्सव का आयोजन, सीमित दर्शकों तथा आन लाइन आयोजित किया जा सकता है।

आयोजित किए जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय रंगोत्सव मे, हिंदी के साथ ही प्रादेशिक भारतीय भाषाओं, विभिन्न लोक शैलियों के कुल 701 प्रविष्टिया दाखिल हुई थी, जिसमे, 661 भारतीय और, 40 विदेशी नाटकों की प्रविष्टिया शामिल थी। देशभर के 48 रंगमंच विशेषज्ञों की टीम द्वारा, कुल 87 चयनित नाटकों में, 77 भारतीय व 10 इटली, पोलैंड, श्रीलंका, बंग्लादेश तथा नेपाल के नाटकों का चयन किया गया है।

‘भारत रंग महोत्सव’ (भारंगम) आयोजित करने के पीछे आयोजकों की मुख्य सोच रही है, आयोजन मे समस्त देश के नाटकों के दर्शन हो तथा श्रेष्ठता के बदले सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व मुख्य मानक हो। उक्त उद्देश्यो को दी जा रही, प्रमुखता के बल ही, विगत 23 वर्षो से निरंतर देश के सबसे बडे और अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस नाट्य उत्सव मे, दुनिया का चौथा सर्वश्रेष्ठ माना जाने वाला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष परेश रावल व निर्देशक वामन केन्द्रे के दिशानिर्देशो के तहत, प्रविष्टियों मे शामिल नाटकों की केवल गुणवत्ता नहीं, प्रतिनिधित्व का ध्यान भी रखा जाता रहा है।

उक्त महोत्सव में प्रतिभाग कर रही, 1968 मे स्थापित, राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय फलक पर ख्याति प्राप्त सांस्कृतिक संस्था, ‘पर्वतीय कला केंद्र, दिल्ली’, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा, सन 1989 से निरंतर 28 वर्षो तक, रंगमंडल का दर्जा प्राप्त, देश की अव्वल दर्जे की सांस्कृतिक संस्थाओ मे सुमार रही है। 2001 मे ‘अमीर खुसरो’ तथा 2005 मे ‘भाना गगंनाथ’ का मंचन ‘भारत रंग महोत्सव’ (भारंगम) मे मंचित कर ख्याति अर्जित कर चुकी है। 2018 भारत में आयोजित ‘ओलंपिक थियेटर’ मे ‘पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली’ द्वारा मंचित गीतनाट्य ‘राजुला-मालूशाही’ के मंचन ने वैश्विक फलक पर बडी ख्याति अर्जित की थी। राष्ट्रीय व वैश्विक फलक पर ‘पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली’ द्वारा, अनेको राज्यो व देशो का भ्रमण कर, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमो मे, भागीदारी कर, उत्तराखंड के साथ-साथ भारतवर्ष का नाम रोशन किया है।

दिल्ली प्रवास मे, उत्तराखंड की ख्याति प्राप्त इस सांस्कृतिक संस्था की अनेकों लोकगाथाओं व अन्य कार्यक्रमो का राष्ट्रीय प्रसारण, दूरदर्शन व आकाशवाणी से भी प्रसारित होता रहा हैं। देश के अनेकों महानगरों, नगरों व कस्बो मे भारत सरकार, राज्य सरकारो व स्थानीय संस्थाओं द्वारा आयोजित उत्सवो व समारोहों मे इस संस्था के गीत-संगीत व लोकगाथाओं के कार्यक्रम, मंचित होते रहे हैं। वर्तमान में ‘पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली’, देश की एक मात्र प्रमुख सांस्कृतिक संस्था है, जो गीतनाट्य मंचन के क्षेत्र मे, अव्वल स्थान रखती है।
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