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राठ पैठाणी की होल्यार टोली का दिल्ली में स्वागत, परंपरा और भावनाओं से सजी संध्या

Amar sandesh नई दिल्ली। गढ़वाल के राठ पैठाणी क्षेत्र से आई होल्यारों की टोली का आज दिल्ली स्थित आवास पर आत्मीय स्वागत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्य यंत्रों की मधुर थाप के साथ जब होल्यारों ने होली गीतों की प्रस्तुति दी, तो पूरा वातावरण रंग, उल्लास और सांस्कृतिक भावनाओं से सराबोर हो उठा।

 

यह प्रसन्नता का विषय है कि नई पीढ़ी के युवा अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल-दमाऊ, तुरही, भंकोरा आदि—के साथ अपनी विशिष्ट पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं। उनकी प्रस्तुतियों में केवल होली के पारंपरिक गीत ही नहीं, बल्कि गढ़वाली संस्कृति, गांव-घर की स्मृतियाँ, प्रकृति का सौंदर्य, प्रेम की अभिव्यक्ति, पलायन की पीड़ा और सामाजिक चेतना के संदेश भी समाहित रहे।
विशेष रूप से “पुराणी ड्येली गया तुमरी तख ताला लग्यांन…” जैसे मार्मिक गीत ने वीरान होते गांवों की वेदना को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया। बचपन में गांवों में सुने गए इन लोकगीतों को पुनः मौलिक स्वरूप में सुनना सभी के लिए भावुक क्षण बन गया।
उल्लेखनीय है कि रात की होलिया टीम ने पूर्व में देहरादून सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में अपनी प्रस्तुतियों से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है। उनके गीतों ने न केवल होली के रंग बिखेरे, बल्कि रिवर्स पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी जनजागरूकता का संदेश दिया।
आज दिल्ली में अनिल बलूनी, जो उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हैं, के निवास पर पहुंची इस होल्यार टोली ने होली के पारंपरिक गीतों और रंगों से समूचे वातावरण को सांस्कृतिक उत्सव में परिवर्तित कर दिया। कार्यक्रम आत्मीय संवाद, सांस्कृतिक गर्व और उत्तराखंडी अस्मिता के उत्सव का प्रतीक बन गया।

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