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गांधी विचारों के संवाहक और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व: –डॉ. रजनीश कुमार

बिहार की माटी से गांधी विचारों तक की यात्रा—: डॉ. रजनीश कुमार

अमर चंद्र

विशेष लेख

नई दिल्ली। डॉ. रजनीश कुमार मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। बिहार की वैचारिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा ने उनके व्यक्तित्व को गहराई और दृष्टि प्रदान की है। ज्ञान, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की जो चेतना इस भूमि से निकलती रही है, वही चेतना डॉ. रजनीश कुमार के जीवन और कृतित्व में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

डॉ. रजनीश कुमार ने अपनी शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जीवन मूल्यों और समाज सेवा से जोड़ा। उनका शैक्षणिक सफर अध्ययनशीलता, अनुशासन और सतत सीखने की भावना से परिपूर्ण रहा है। बहुभाषी ज्ञान के कारण वे विभिन्न समाजों, संस्कृतियों और विचारधाराओं के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने में सक्षम हैं, जो उन्हें एक विद्वान और विचारशील व्यक्तित्व के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाता है।

वर्तमान में वे राजघाट समाधि समिति सचिव पद कार्यरत हैं ,ओर अखिल भारतीय नशाबंदी परिषद के अध्यक्ष, और महात्मा गांधी के विचारों के प्रचार-प्रसार में निरंतर योगदान दे रहे हैं। सत्य, अहिंसा, सेवा, सादगी और नैतिकता जैसे गांधीवादी मूल्यों को उन्होंने केवल वैचारिक स्तर पर नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार में आत्मसात किया है। यही कारण है कि उनका व्यक्तित्व गांधी विचारों का जीवंत उदाहरण प्रतीत होता है।

समाजसेवा डॉ. रजनीश कुमार के जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष है। वे मानते हैं कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए केवल विचार नहीं, बल्कि आचरण का शुद्ध होना आवश्यक है। इसी सोच के साथ वे युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को नैतिक मूल्यों, राष्ट्रबोध और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का कार्य करते रहे हैं।

उनकी सरलता, विचारों की स्पष्टता और सेवा-भाव उन्हें आमजन से जोड़ता है। डॉ. रजनीश कुमार का जीवन यह संदेश देता है कि आधुनिक समय में भी गांधी विचार पूरी तरह प्रासंगिक हैं और यदि उन्हें सही अर्थों में अपनाया जाए तो वे समाज को नई दिशा देने में सक्षम हैं।

बिहार की माटी से निकला यह व्यक्तित्व आज गांधी विचारों का संवाहक बनकर समाज के सामने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। डॉ. रजनीश कुमार का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा देता है कि शिक्षा, विचार और सेवा का समन्वय ही सशक्त समाज की नींव रखता है।

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