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युग पुरुष स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी पर विशेष लेख
लेखक :पंडित मोहन लाल बड़ौली
प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा हरियाणा
युग पुरुष स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपनी वाक्पटुता, कवित्व और दूरदर्शिता से देश को नई दिशा दी। वे भारत के प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने तीन बार इस पद को संभाला और भारतीय जनता पार्टी को मुख्यधारा की राजनीति में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (अब मध्य प्रदेश) में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे वाजपेयी जी का जीवन संघर्ष, समर्पण और सेवा की मिसाल है।
अटल जी के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी स्कूल शिक्षक थे, जबकि मां कृष्णा देवी गृहिणी। वाजपेयी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के सरस्वती शिशु मंदिर से प्राप्त की और बाद में विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) से अंग्रेजी, संस्कृत और हिंदी में स्नातक किया। उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री भी हासिल की। वाजपेयी जी का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से शुरू हुआ। वे 1940 के दशक में आरएसएस के सक्रिय सदस्य बने और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल भी गए।
अटल जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। ’राष्ट्रधर्म’ तथा ’पांचजन्य’ जैसे समाचार पत्रों में संपादक के रूप में कार्य किया। उनकी वाक्पटुता ने उन्हें संसद में एक प्रमुख विपक्षी नेता बनाया। 1957 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए अटल बिहारी वाजपेयी ने दस बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया।
अटल जी 1960 के दशक में जनसंघ के प्रमुख प्रवक्ता बने और इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई। आपातकाल (1975-1977) के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन इससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। 1977 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार में वाजपेयी जी को विदेश मंत्री बनाया गया। इस पद पर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर इतिहास रचा, जो भारतीय भाषा की वैश्विक पहचान का प्रतीक बना।
जनता पार्टी के विघटन के बाद, 1980 में अटल जी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की। भाजपा के पहले अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को हिंदुत्व की विचारधारा पर आधारित करते हुए उदारवादी चेहरा दिया। 1984 के चुनाव में भाजपा को केवल दो सीटें मिलीं, लेकिन वाजपेयी जी के नेतृत्व में पार्टी ने पुनरुत्थान किया।
अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री बनना भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। 1996 में वे पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन केवल 13 दिनों तक सरकार चली। 1998 में दूसरी बार सत्ता में आए, लेकिन 13 महीनों में सरकार गिर गई। 1999 के चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत के बाद, वे पूर्ण कार्यकाल (1999-2004) तक प्रधानमंत्री रहे।
अटल जी ने इस दौरान कई ऐतिहासिक निर्णय लिए। 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण कर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे, लेकिन देश की सुरक्षा मजबूत हुई। 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को हराकर राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन किया। उन्होंने लाहौर बस यात्रा से भारत-पाक शांति की पहल की, हालांकि कारगिल ने इसे प्रभावित किया। आर्थिक मोर्चे पर वाजपेयी सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना शुरू की जो देश के प्रमुख शहरों को राजमार्गों से जोड़ने वाली थी।
सर्व शिक्षा अभियान से शिक्षा को बढ़ावा दिया और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाया। उनके कार्यकाल में जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत तक पहुंची। विदेश नीति में उन्होंने अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित की और इजरायल के साथ संबंध मजबूत किए। वाजपेयी जी न राजनेता के साथ-साथ एक उत्कृष्ट कवि और लेखक भी। उनकी कविताएं जैसे ’क्या खोया क्या पाया’ और ’मौत से ठन गई’ जीवन के दर्शन को छूती हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में योगदान दिया और संसद में उनके भाषण काव्यात्मक होते थे। व्यक्तिगत जीवन में वे अविवाहित रहे और अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित किया। स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, वे सक्रिय रहे। 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
भारत सरकार ने अटल जी को भारत रत्न से सम्मानित किया। वाजपेयी जी की विरासत आज भी जीवित है। भाजपा की सफलता, परमाणु नीति, आर्थिक सुधार और शांति प्रयासों में वे एक ऐसे नेता थे जो सभी को सम्मान देते थे और उनकी राजनीति सर्वसमावेशी थी। वाजपेयी जी का मॉडल प्रेरणा देता है।
अटल बिहारी वाजपेयी सच्चे अर्थों में ’अजातशत्रु’ थे जिनके कोई शत्रु नहीं। उनकी जीवनी हमें सिखाती है कि राजनीति में नैतिकता और दूर दृष्टि कितनी महत्वपूर्ण है। वाजपेयी जी ने साबित किया कि एक कवि भी एक मजबूत नेता बन सकता है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने अद्भुत, दूरदर्शी नेतृत्व और अटल संकल्प के साथ भारत को सुशासन, विकास, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय गौरव की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भारत को 21वीं सदी की महाशक्ति बनाने की दिशा में अटल जी का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण रहा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम न मानकर राष्ट्रसेवा का एक आदर्श मार्ग बनाया। आज उनके विचार और आदर्श हम सबके लिए प्रेरणा-सोत हैं। अटल जी का जीवन संदेश देता है कि हर एक परिस्थितियों में भी राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है। 25 दिसंबर का दिन भारतीय राजनीति और भारतीय जनमानस के लिए एक तरह से सुशासन का अटल दिवस है। आज पूरा देश अपने भारत रत्न अटल को उस आदर्श विभूति के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता से करोड़ों भारतीयों के मन में जगह बनाई। पूरा देश उनके योगदान के प्रति कृतज्ञ है।
एक प्रधानमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल इतना गौरवशाली रहा कि एक दशक के बाद भी उस कार्यकाल को न सिर्फ याद किया जाता है. बल्कि उस पर अमल भी किया जाता है। आज अटल जी का रोपित बीज, एक वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा की नव पीढ़ी को रच रहा है। अटल जी की जयंती, भारत में सुशासन के एक महान राष्ट्र पुरुष की जयंती है। आइए हम सब उनके सपनों को साकार करने के लिए मिलकर काम करें।
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