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समुद्र में छिपे ऊर्जा भंडार की तलाश को मिलेगी रफ्तार, 84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना पर तेज हुआ अमल

हरदीप पुरी ने ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक, KG से अंडमान और कावेरी तक तेज होगी तेल-गैस खोज

Amar sandesh नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अपनी समुद्री ऊर्जा खोज को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के नेतृत्व के साथ बैठक कर गुरुग्राम में हुए 11वें और असम के दुलियाजान में आयोजित 12वें ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन में लिए गए फैसलों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की।
श्री पुरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना पर फोकस
बैठक का प्रमुख केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन’ नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम रही। केंद्रीय मंत्रिमंडल इस योजना को 31 जुलाई 2026 को मंजूरी दे चुका है। योजना के लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य समुद्र में मौजूद भारत की विशाल तेल और गैस क्षमता का दोहन करते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
योजना के तहत बड़े पैमाने पर 2D और 3D सीस्मिक सर्वे, डीपवाटर एवं अल्ट्रा-डीपवाटर ड्रिलिंग तथा साझा ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार के अनुसार, योजना से हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार में 600 MMTOE से अधिक की वृद्धि की संभावना है और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
KG, महानदी, अंडमान और कावेरी बेसिन पर नजर
बैठक में कृष्णा-गोदावरी (KG), महानदी, अंडमान और कावेरी बेसिन में ड्रिलिंग, सीस्मिक सर्वे और रिग की तैनाती को गति देने के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई। इस अभियान में महारत्न कंपनियां ONGC और Oil India Limited प्रमुख भूमिका निभाएंगी।
ऑफशोर ड्रिलिंग क्षमता बढ़ाने के लिए ONGC के नेतृत्व में ड्रिलशिप क्षमता विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य साझा निवेश और दीर्घकालिक चार्टरिंग के जरिए डीपवाटर एक्सप्लोरेशन की महत्वपूर्ण बुनियादी जरूरत को पूरा करना है।
पूर्वोत्तर के गैस भंडार को मिलेगा नया रास्ता
बैठक में पूर्वोत्तर भारत की गैस क्षमता के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया गया। दुलियाजान फीडर लाइन और नेशनल गैस ग्रिड से जुड़ाव के माध्यम से असम और पूर्वोत्तर के गैस संसाधनों को बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की क्षमता मजबूत होगी। दुलियाजान फीडर लाइन परियोजना के लिए ONGC बोर्ड ने Indradhanush Gas Grid Limited (IGGL) में इक्विटी निवेश और कॉरपोरेट गारंटी को भी मंजूरी दी है।
IGGL, IOCL, ONGC, GAIL, Oil India और Numaligarh Refinery Limited का संयुक्त उपक्रम है, जो पूर्वोत्तर गैस ग्रिड से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
CBG और ग्रीन एनर्जी पर भी जोर
बैठक में Compressed Biogas (CBG) के लिए फीडस्टॉक मैपिंग, सहकारी क्लस्टरों और बाजार तक पहुंच मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में हरित बदलाव और नई पीढ़ी के जैव ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम तेज करने पर जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य भारत के लिए सुरक्षित, सस्ती, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है। यह पूरी कवायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के व्यापक विजन के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।

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