राष्ट्रीयस्वास्थ्य

नन्ही दीक्षा की जिंदगी बचाने को आगे आया समाज, जुटाई ₹1.25 लाख की सहायता

एम्स में ब्लड कैंसर का इलाज करा रही तीन वर्षीय बच्ची, अभी 7–8 महीने और चलना है उपचार; अध्यक्ष हरीश साह ने बसमाज से सहयोग की अपील की

अमर संदेश की अपील, हरीश साह के साथ नन्ही दीक्षा के लिए समाज बने सहारा

 

Amar sandesh दिल्ली। मानवीय संवेदना और सामाजिक एकजुटता की एक प्रेरक मिसाल सामने आई है। करीब तीन वर्षीय नन्ही दीक्षा ब्लड कैंसर से जूझ रही है और पिछले करीब चार महीनों से दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है। बच्ची के इलाज में लगातार रक्त चढ़ाने के साथ संक्रमण से बचाव के लिए इंजेक्शन भी लगाए जा रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार उपचार अभी करीब 7–8 महीने और चल सकता है, ऐसे में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार के सामने इलाज का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

दीक्षा की पीड़ा की जानकारी मिलने पर उत्तराखंड कुमाऊं समाज सेवा समिति, वैशाली उस परिवार को सहायता करने की पहल की अपने मेंबरों से सहयोग राशि जुटाई और अपनी सहयोगी संस्था से भी सहयोग की अपील की गई कुमाऊं सभा गाजियाबाद के सदस्यों और सहयोगकर्ताओं ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए सहायता अभियान में आ0आना सहयोग देना शुरू किया। सामूहिक प्रयासों से अब तक करीब ₹1.25 लाख की आर्थिक सहायता जुटाई जा चुकी है। इसमें ₹1.10 लाख का चेक तैयार किया गया है, जबकि करीब ₹15 हजार की राशि बच्ची के परिजनों के बैंक खाते में सीधे भेजी जा चुकी है।

 हरीश साह की अपील दीक्षा के लिए आगे आए समाज

उत्तराखंड कुमाऊं समाज सेवा समिति, वैशाली के अध्यक्ष हरीश साह ने कहा कि संस्था के सदस्यों और सहयोगियों ने मानवीय भावना के साथ बच्ची के इलाज में सहयोग किया है। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों, सामाजिक संस्थाओं और शुभचिंतकों से अपील की कि दीक्षा के इलाज में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि अभी बच्ची का उपचार कई महीनों तक चलना है, इसलिए आगे भी समाज के सहयोग की आवश्यकता रहेगी।

सहायता अभियान को आगे बढ़ाने में देव पटवाल (नोएडा), ऐना सिंह (शास्त्रीनगर) तथा कुमाऊं सभा से प्रमोद तिवारी (संजय नगर) की सक्रिय भूमिका रही। समिति अध्यक्ष हरीश साह ने सभी सदस्यों, सहयोगकर्ताओं और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी संस्था जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए इसी तरह एकजुट होकर कार्य करती रहेगी।

एक छोटी मदद, नन्ही जिंदगी के लिए बड़ी उम्मीद

दीक्षा के परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है। लंबा इलाज, बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत और संक्रमण से बचाव का खर्च परिवार की आर्थिक क्षमता पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में समाज के लोगों की मदद उनके लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि हिम्मत और उम्मीद का सहारा भी बन सकती है।

अमर संदेश की अपील नन्ही दीक्षा जिंदगी की जंग लड़ रही है। आइए, हम सब मिलकर उसके परिवार का सहारा बनें। आपकी छोटी-सी मदद भी इस नन्ही बच्ची के इलाज की राह में बड़ी उम्मीद बन सकती है। समाज के सक्षम लोग आगे आएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें।

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