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क्या बढ़ रही है लोगों की आय? सात करोड़ तक पहुंची आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या।


— – महाबीर सिंह।

 

 

नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर 2023 – क्या देश में लोगों की आय बढ़ रही है। क्या युवाओं को रोजगार मिल रहा है और क्या उनकी उंची आय से आयकर के रूप में सरकार का खजाना तेजी से भर रहा है। बहरहाल, सरकार द्वारा जारी आयकर रिटर्न के आंकड़े कुछ यही संकेत दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार आकलन वर्ष 2013-14 में जहां 3.36 करोड़ व्यक्तिगत करदाताओं ने आयकर रिटर्न दाखिल की थी वहीं निर्धारण वर्ष 2021-22 में इनकी संख्या 6.37 करोड़ तक पहुंच गई। यानि इन आठ साल में आईटीआर दाखिल करने वालों की संख्या 90 प्रतिशत बढ़ गई।
इन आकड़ों में बताया गया है कि 2013-14 से निर्धारण वर्ष 2021-22 की अवधि में व्यक्तिगत करदाताओं की औसत सकल कुल आय 56 प्रतिशत बढ़ गई। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने ये आकड़े जारी किये हैं। आयकर विभाग इस वृद्धि के लिये सरकार द्वारा उठाये गये कदमों को श्रेय दे रहा है। उसका कहना है कि पिछले सालों के दौरान कर प्रशासन को पारदर्शी बनाने और कर अनुपालन आसान बनाने के लिये कई उपाय किये गये जिससे रिटर्न भरने वालों की संख्या साल दर साल बढ़ती गई। विभाग समय समय इससे संबंधित आंकड़े जारी करता रहता है।
विभाग के मुताबिक ये आंकड़़े यहीं संकेत देते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पिछले आठ- नौ साल के दौरान आयकर दाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। आकलन वर्ष 2021-22 में रिटर्न भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या जहां 2013-14 के मुकाबले 90 प्रतिशत बढ़कर 6.37 करोड़ पर पहुंच गई है वहीं चालू वित्त वर्ष 2023-24 में अब तक 7.41 करोड़ रिटर्न दाखिल किये जा चुके हैं। इनमें 53 लाख पहली बार रिटर्न दाखिल करने वाले भी शामिल हैं।
इतना ही नहीं विभिन्न आयवर्ग में भी व्यक्तिगत करदाताओं द्वारा भरी गई रिटर्न में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वार्षिक पांच लाख रूपये तक के आय वर्ग में दाखिल रिटर्न की संख्या 2013-14 के 2.62 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 3.47 करोड़ तक पहुंच गई, यानि इनमें 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह बताता है कि आयकर की सबसे निचली श्रेणी में भी रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि, आयकर विभाग का कहना है कि इस श्रेणी में ऐसे लोग भी हंै जिनकी आय हो सकता है कि करयोग्य सीमा से नीचे हो और वह आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करते हों। वहीं इन आठ वित्तीय वर्ष में पांच से 10 लाख और 10 से 25 लाख की आय श्रेणी में व्यक्तिगत करदाताओं द्वारा रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या क्रमशः 295 प्रतिशत और 291 प्रतिशत, यानी तीन-चार गुणा तक बढ़ गई।

वर्तमान आयकर व्यवस्था में ढाई लाख रूपये तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं है जबकि ढाई से पांच लाख रूपये तक सालाना आय पर 5 प्रतिशत, पांच से दस लाख रूप्ये की आय पर 20 प्रतिशत और दस लाख वार्षिक से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लागू है। 60 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक और 80 साल अथवा इससे अधिक बुजुर्गों के लिये क्रमशः तीन लाख और पांच लाख रूप्ये तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं है। वहीं 50 लाख रूपये से अधिक आय पर अधिभार लागू है। दूसरी तरफ एक वैकल्पिक आयकर व्यवस्था भी शुरू की गई है जिसमें विभिन्न छूट समाप्त की गई हैं लेकिन कर की दर पुरानी व्यवस्था के मुकाबले अपेक्षाकृत कम रखी गई है। इसमें 3.00 लाख रूपये तक शून्य, 3.01 से छह लाख रूपये पर 5 प्रतिशत, 6.01 से 9.00 लाख रूपये वार्षिक आय पर 10 प्रतिशत, 9.01 से लेकर 12.00 लाख पर 15 प्रतिशत, 12.01 से 15.00 लाख पर 20 प्रतिशत, और 15.01 और इससे अधिक वार्षिक आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाने का प्रावधान है। वैकल्पिक कर व्यवस्था 2020 में शुरू की गई थी, इस साल के बजट में इसे अधिक आकर्षक बनाते हुये कहा गया है कि जहां पहले पांच लाख रूपये तक की आय पर कोई कर नहीं था वहीं इस व्यवस्था में सात लाख रूप्ये तक की व्यक्तिगत आय पर कर छूट होगी। स्पष्ट है कि जहां पुरानी व्यवस्था में 10 लाख और उससे अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर लागू है वहीं नई वैकल्पिक व्यवस्था में 15 लाख और उससे अधिक की वार्षिक आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाया गया है। हालांकि, पुरानी व्यवस्था में पीएफ कटौती, बचत, निवेश, एनपीएस में निवेश, चिकित्सा बीमा प्रीमियम और हाउसिंग लोन पर दिये जाने वाले ब्याज सहित कई तरह की रियायतें लागू हैं, जबकि नई व्यवस्था में एक-दो को छोड़कर तमाम छूट को समाप्त किया गया है।

आयकर विभाग ने इन आंकड़ों का विश्लेषण करते हुये यह भी बताया है कि आकलन वर्ष 2013-14 और आकलन वर्ष 2021-22 की आठ साल की अवधि में शीर्ष आय वाले एक प्रतिशत व्यक्तिगत करदाताओं का आनुपातिक योगदान सभी व्यक्तिगत करदाताओं के समक्ष 2013-14 के 15.9 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 14.6 प्रतिशत रह गया वहीं सबसे निचले वर्ग के 25 प्रतिशत व्यक्तिगत करदाताओं का आनुपातिक योगदान सभी व्यक्तिगत करदाताओं के समक्ष 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 8.4 प्रतिशत हो गया। वहीं, 74 प्रतिशत मध्यम आय वर्ग के करदाताओं का अनुपात 75.8 प्रतिशत से बढ़कर 77 प्रतिशत पर पहुंच गया।
आंकड़े बताते हंै कि निम्न आय वर्ग की औसत सकल आय में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह औसत आय 2013-14 में 4.5 लाख रूपये थी वहीं 2021-22 में यह बढ़कर 7 लाख रूपये वार्षिक हो गई। सबसे उंची आय वाले शीर्ष एक प्रतिशत व्यक्तिगत करदाताओं की औसत सकल आय में जहां आठ साल में 42 प्रतिशत वृद्धि हुई है वहीं सबसे नीचे वर्ग में आने वाले 25 प्रतिशत व्यक्तिगत करदाताओं की औसत में आय में 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आयकर विभाग के आंकड़े दर्शाते हैं कि विभिन्न आय वर्गों में व्यक्तियों की सकल आय में भी अच्छी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2013- 14 में जहां शुद्ध प्रत्यक्ष कर प्राप्ति 6.38 लाख करोड़ रूपये रही वहीं 2022-23 में यह 16.61 लाख करोड़ रूपये तक पहुंच गई। यह करदाताओं के अनुकूल और करदाता उन्मुख प्रगतिशील नीतियां अपनाने से संभव हुआ है। विभाग का कहना है कि वह प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, प्रशासन में दक्षता और करदाताओं, हितधारकों के साथ विश्वास बढ़ाने के लिये लगातार प्रयास को प्रतिबद्ध है।
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