वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमलाल भट्ट, मंगलेश डबराल एवं समाजसेवी दीवान सिंह नयाल को उत्तराखंड समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

द्वारिका प्रसाद चमोली दिल्ली।वक्त कब करबट ले ये कोई नहीं जानता। साल की शुरुआत जहां सुखद हुई थी वहीं मार्च के बाद वैश्विक बीमारी कोविड 19 ने सबके जीवन को रोक दिया यहाँ तक कि लोगों के रोजगार तक छीन लिए। जो भाई चारा था उसे शक में तब्दील कर दिया हर कोई बस स्वयं की चिंता में लगा थे वही कुछ समाजसेवी और साहित्यकार अपनी जान की परवाह न करते हुए सेवा भाव को बरक़रार रख लोगों की सेवा में लगातार लगे हुए थे इसका परिणाम ये हुआ कि वे वैश्विक बीमारी की चपेट में आये और अनायास ही हमसे व् इस दुनिया से चुपचाप ज्यादा हो गए। ऐसे कर्मवीरों का यूँ चले जाना न केवल समाज की क्षति हुई है अपितु हमारी संस्कृति व् साहित्य को भी भारी क्षति हुई। अपने इन महान विभूतियों के चले जाने को दुःख परिवार को तो है ही लेकिन उत्तराखंडी समाज भी ग़मगीन है।

इन तिनों शख्सियतों की याद में डीपीएमआई सभागार न्यू अशोक नगर दिल्ली में,उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच एवं उत्तराखंड एकता मंच के तत्वाधान में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लेखक-कवि पत्रकार और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रेमलाल भट्ट, मंगलेश डबराल और दीवान सिंह नयाल जी को श्रद्धां सुमन अर्पित किए।

श्रद्धांजलि सभा में प्रेमलाल भट्ट व् दीवान सिंह नयाल जी के पारिवारिक लोग भी मौजूद थे जिन्होंने उनकी जीवन यात्रा मुश्किल पलों को व् समाज के प्रति उनकी भावना को सबके साथ साँझा किया। प्रेमलाल जी के सुपुत्र ने अपने पिताजी के साहित्यिक अनुभवों व् उनके जीवन के अनुछुए पहलुओं से सबको अवगत कराया और नए साहित्यकारों को भी उनकी साहित्य साधना को पहचान उनके मार्ग पर आगे बढ़ने को प्रेरित किया। नयाल जी के सुपत्र ने उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने का बेडा उठाया तो उनकी बेटी ने रुंधे गले से मशहूर शायर जगजीत सिंह की गजल “न चिट्ठी न कोई संदेश जाने व् कोण सा देश जहां तुम चले गए” गाकर सबकी आँखों को नम कर दिया।

दिल्ली में उत्तराखंड समाज के अग्रणी समाजसेवी डॉक्टर विनोद बछेती ने अपनी इन विभूतियों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हमारी ये महान हस्तियों सदा समाज को साथ लेकर सबको एक करने का प्रयास करती रही अतः हमें चाहिए की हमारे विचार चाहे जिससे भी मेल खाते हों किन्तु समाज के लिए हमें सदैंव संगठित हो आगे बढ़ना होगा साथ ही अपनी बोली भाषा को आगे बढ़ाना होगा। श्री बछेती समय-समय पर रहते इस तरह के सामाजिक कार्य करते हैं और ये कहीं ना कहीं समाज के प्रति उनकी पीड़ा को दर्शाती है।

कांग्रेस के पूर्व राज्यमंत्री धीरेन्द्र प्रताप ने भी नयाल जी के साथ बिताये अपने राजनितिक दिनों के साथ को व् नयाल जी की कर्तव्यनिष्ठा समाज के प्रति समर्पण भावना को याद कर सभी को श्रद्धा सुमन अर्पित किये। सभा का संचालन कुशल वक्ता कवी व वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश ध्यानी जी ने किया। कार्यक्रम की रूपरेखा राज्य आंदोलनकारी श्री अनिल कुमार पन्त, लक्ष्मी बिष्ट एवं पत्रकार हरीश असवाल ने रखी।

वरिष्ठ साहित्यकार ललित केशवान , वरिष्ठ उत्तराखंड आंदोलनकारी पत्रकार देव सिंह रावत , योगेश भट्ट , दयाल सिंह नेगी ,श्री उदय महंगाई राठी जी,श्री कमल पोखरियाल जी,श्री रमेश कांडपाल ,श्री निरज बावरी ,श्री रवि चतुर्वेदी , सुरेंद्र हालशी ,श्री सुरेंद्र रावत,श्री अमर चंद्र, श्री सुरिंदर कुमार शर्मा,,श्री उमेश रावत श्री द्वारिका प्रसाद चमोली ,श्री कमल किशोर भट्ट ,श्री रमेश हितेषी ,श्री ओम प्रकाश आर्य ,श्री संतोष जोशी , श्री दर्शन सिंह रावत ,श्री आनंद जोशी ,श्री राकेश नेगी , श्री वीरेंदर जुयाल उपरी , अनूप सिंह रावत और अन्य अनेकों समाज हितेषियों ने श्रद्धांजलि सभा में पहुँच कर पुण्य आत्माओं को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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